Geneva: पाकिस्तान में शिया और अहमदिया अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर मानवाधिकार कार्यकर्ता ने उठाई गंभीर चिंता।

Nura Basta19 September 20262 min read17 viewsWorld
Geneva: पाकिस्तान में शिया और अहमदिया अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर मानवाधिकार कार्यकर्ता ने उठाई गंभीर चिंता।

जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता खलीलुर रहमान ने वैश्विक मंच पर अपनी बात रखते हुए पाकिस्तान में शिया और अहमदिया समुदायों के अधिकारों की रक्षा का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में इन समुदायों के लोगों को किन गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और देश में उनके धार्मिक अधिकारों का हनन लगातार हो रहा है।

पाकिस्तान की कानूनी जिम्मेदारियां और मानवाधिकार

अधिवेशन के दौरान मानवाधिकार कार्यकर्ता ने याद दिलाया कि पाकिस्तान भी संयुक्त राष्ट्र के नियमों से बंधा हुआ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह सार्वभौम मानवाधिकार घोषणापत्र के अनुच्छेदों का पालन करे। इन अनुच्छेदों में कानून के सामने समानता, किसी भी प्रकार का भेदभाव न करने और विचार, अंतरात्मा तथा धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार शामिल है। इसके अलावा उन्होंने धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़े घोषणापत्र का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान में आज भी धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर हालात चिंताजनक बने हुए हैं।

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हिंसक घटनाएं और इबादतगाहों को बंद करने का मामला

खलीलुर रहमान ने अपनी बात रखते हुए हाल ही में सामने आई कुछ घटनाओं का विशेष तौर पर जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे कराची में ईद के जश्न के दौरान हिंसक हमले हुए थे, जिससे वहां रहने वाले समुदायों में डर का माहौल बन गया था। इसके साथ ही उन्होंने कराची और लाहौर समेत देश के बड़े शहरों में अहमदिया समुदाय के प्रार्थना स्थलों और इबादतगाहों को जबरन सील करने या बंद किए जाने की घटनाओं का भी पर्दाफाश किया। उन्होंने परिषद से आग्रह किया कि वह इस मामले में कड़े कदम उठाए ताकि हर समुदाय के लोगों को कानून के तहत समान सुरक्षा मिल सके।

मंच पर हुई चर्चा और समयसीमा

यह महत्वपूर्ण हस्तक्षेप जिनेवा में चल रहे मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के एजेंडा आइटम 3 के तहत सामान्य बहस के दौरान सामने आया। जिनेवा में यह सत्र 7 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें दुनिया भर के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हो रही है। कार्यकर्ता ने जिनेवा स्थित परिषद और उससे जुड़ी अन्य संस्थाओं से मांग की कि वे यह सुनिश्चित करें कि पाकिस्तान में सभी धार्मिक समुदायों के सदस्यों को हिंसा, डराने-धमकाने और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई से पूरी तरह बचाया जाए।

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