जर्मनी की अदालत ने ईरान की खुफिया एजेंसी के इशारे पर इजरायल समर्थकों पर हमले की साजिश रचने वाले दो लोगों को सुनाई सजा

हैम्बर्ग: जर्मनी की हैम्बर्ग हायर रीजनल कोर्ट ने गुरुवार को दो ऐसे लोगों को जेल की सजा सुनाई है जिन्होंने ईरान की खुफिया एजेंसी के निर्देश पर इजरायल समर्थकों के खिलाफ हमले की साजिश रची थी। अदालत ने यह फैसला 15 अक्टूबर 2026 को सुनाया।
इस मामले में डेनमार्क के नागरिक अली एस. को आठ और आधा साल की सजा मिली है। उस पर जासूसी, हत्या की कोशिश, आगजनी, तोड़फोड़ और जानलेवा हमलों की योजना बनाने का दोष सिद्ध हुआ है। कोर्ट ने पाया कि अली एस. को 2025 की शुरुआत में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की विदेशी शाखा कुड्स फोर्स से आदेश मिले थे।
वहीं, उसके साथी और अफगानिस्तान के नागरिक तवाब एम. को साढ़े चार साल की सजा सुनाई गई है। तवाब ने पूर्व सांसद और जर्मन-इजरायली सोसाइटी के अध्यक्ष वोल्कर बेक पर हमले के लिए हथियार मुहैया कराने और एक व्यक्ति की भर्ती करने पर सहमति जताई थी।
इस नाकाम साजिश के निशाने पर जर्मनी में यहूदियों की सेंट्रल काउंसिल के प्रमुख जोसेफ शुस्टर, वोल्कर बेक और बर्लिन के दो यहूदी दुकानदार थे। फेडरल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर द्वारा 7 मई 2026 को आरोप पत्र दाखिल करने के बाद 26 जून 2026 से इस मामले की कानूनी कार्यवाही शुरू हुई थी।
जांच के दौरान अली एस. को जून 2025 में डेनमार्क से और तवाब एम. को नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद दोनों को जर्मनी प्रत्यर्पित किया गया। जुलाई 2025 में अली एस. की गिरफ्तारी के बाद जर्मन विदेश मंत्रालय ने ईरान के राजदूत को बुलाकर औपचारिक विरोध दर्ज कराया था।
बर्लिन स्थित ईरानी दूतावास ने पहले इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि ये दावे ईरान के दुश्मनों के इशारे पर किए गए हैं। हालांकि, कई देशों ने यूरोप के भीतर ईरान की घातक साजिशों और गलत हरकतों की निंदा की है।
मई 2026 में जब आरोप सामने आए, तब वोल्कर बेक ने बर्लिन सरकार से ईरानी राजनयिक अधिकारियों को निष्कासित करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि ईरानी शासन यहूदी जीवन और लोकतांत्रिक संस्थानों के लिए लगातार खतरा बना हुआ है।