जर्मनी के जनरल कार्स्टन ब्रॉयर बने नाटो सैन्य समिति के नए प्रमुख, अगले साल संभालेंगे कमान

दुनिया भर में सुरक्षा और रक्षा मामलों को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आया है जिसमें जर्मनी के चीफ ऑफ डिफेंस जनरल कार्स्टन ब्रॉयर को 'उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन' यानी नाटो की सैन्य समिति का अगला अध्यक्ष चुन लिया गया है। यह फैसला 32 सदस्यीय वाले नाटो के सैन्य प्रमुखों की तरफ से शनिवार को डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में आयोजित एक अहम बैठक के दौरान लिया गया, जहां सभी ने ब्रॉयर के पक्ष में अपना मतदान किया।
वर्तमान अध्यक्ष का लेंगे स्थान
मिल रही आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जनरल कार्स्टन ब्रॉयर अगले वर्ष गर्मियों के मौसम में मौजूदा अध्यक्ष और इतालवी एडमिरल ग्यूसेपे कावो ड्रैगोने का स्थान ग्रहण करेंगे। इस नियुक्ति को लेकर निवर्तमान अध्यक्ष ड्रैगोने ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए जनरल ब्रॉयर को बधाई दी। उन्होंने कहा कि वैश्विक गठबंधन को लेकर उनकी गहरी समझ, जमीनी स्तर का परिचालन अनुभव और जर्मन सशस्त्र बलों का नेतृत्व करने का उनका लंबा इतिहास आने वाले समय में नाटो संगठन के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।
चुनौतीपूर्ण माहौल में मिला बड़ा दायित्व
मौजूदा समय में यूरो-अटलांटिक क्षेत्र का सुरक्षा माहौल काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, ऐसे संवेदनशील दौर में संगठन के तमाम सैन्य प्रमुखों ने जनरल ब्रॉयर की काबिलियत पर अपना पूरा भरोसा जताया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 61 वर्षीय जनरल ब्रॉयर जर्मन सेना में एक लंबे अर्से से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें मुख्य रूप से वर्ष 2021-22 के दौरान देश में खासी पहचान मिली थी जब तत्कालीन चांसलर ओलाफ शोल्त्स ने उन्हें कोविड-19 महामारी जैसी खतरनाक स्थिति से निपटने के लिए बनाई गई विशेष संकट समिति का प्रमुख बनाया था। इस दौरान शानदार काम करने के बाद उन्हें देश भर में 'चांसलर के जनरल' के नाम से भी पुकारा जाने लगा था।
लंबा और शानदार सैन्य सफर
जनरल कार्स्टन ब्रॉयर का सैन्य करियर काफी पुराना और प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 1984 में जर्मन सशस्त्र बलों की वायु रक्षा इकाई के साथ की थी। इसके बाद उन्होंने अपनी सैन्य शिक्षा को आगे बढ़ाते हुए अमेरिका के फोर्ट लीवेनवर्थ स्थित जनरल स्टाफ कॉलेज और जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में विशेष जनरल स्टाफ प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके अलावा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सेवा देते हुए वर्ष 2014 में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में नाटो के अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल के साथ भी काम किया था।