इजरायल समर्थकों की हत्या की साजिश के बाद जर्मनी ने ईरानी राजदूत को तलब किया और कड़ा विरोध जताया

बर्लिन: जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को ईरानी राजदूत मजीद निली अहमदबादी को आधिकारिक तौर पर तलब किया है। यह कदम तेहरान की ओर से इजरायल समर्थक हस्तियों की हत्या की साजिश रचने वाले दो लोगों को सजा सुनाए जाने के बाद उठाया गया है।
इससे पहले गुरुवार को हैम्बर्ग की एक अदालत ने ईरानी खुफिया एजेंसी के इशारे पर आतंकी गतिविधियों में शामिल दो लोगों को दोषी ठहराया था। अदालत ने 54 वर्षीय डेनिश नागरिक अली हसन एस को साढ़े आठ साल की जेल की सजा सुनाई है।
जांच में सामने आया कि अली हसन जानकारी जुटाने, आगजनी और हत्या की योजना बनाने के लिए ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की विशेष इकाई कुड्स फोर्स के निर्देश पर काम कर रहा था। वहीं, उसके सहयोगी 43 वर्षीय अफगानी नागरिक तवाब एम को साढ़े चार साल की जेल दी गई है।
अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, इस साजिश के निशाने पर जर्मनी में यहूदियों की केंद्रीय परिषद के अध्यक्ष जोसेफ शुस्टर और जर्मन-इजराइली सोसाइटी के अध्यक्ष वोल्कर बेक थे। इसके अलावा बर्लिन के दो यहूदी दुकानदारों को भी निशाना बनाने की योजना थी।
राजदूत को बुलाने के बाद विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इन कोशिशों की कड़ी निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि हम यहूदी जीवन और उनकी रक्षा करने वालों पर हमलों को बर्दाश्त नहीं करेंगे, चाहे वह कहीं भी हों और जर्मनी में तो बिल्कुल नहीं। मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि ऐसे हमलों के गंभीर कानूनी परिणाम होंगे।
जर्मनी लगातार यूरोपीय संघ से मांग कर रहा है कि IRGC को एक आतंकवादी संगठन घोषित किया जाए। जर्मनी का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां देश की सुरक्षा को अस्थिर करने के सरकारी प्रयासों का सबूत हैं।