जर्मनी ने आईसीजे में निकारागुआ के नरसंहार के मामले को खारिज करने की मांग की, कोर्ट में सुनवाई शुरू.

Sushma Kumari7 September 20262 min read28 viewsWorld
जर्मनी ने आईसीजे में निकारागुआ के नरसंहार के मामले को खारिज करने की मांग की, कोर्ट में सुनवाई शुरू.

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय यानी ICJ में पिछले दिनों यानी 7 सितंबर 2026 को एक बड़ा मामला शुरू हुआ, जिसमें जर्मनी ने निकारागुआ द्वारा लाए गए मुकदमे को पूरी तरह से खारिज करने की मांग की है। निकारागुआ ने यह मामला मूल रूप से 1 मार्च 2024 को दर्ज कराया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि गाजा पट्टी में इजरायल के सैन्य अभियान के दौरान जर्मनी ने उसे राजनीतिक, वित्तीय और सैन्य सहायता दी है। इसके साथ ही निकारागुआ का कहना है कि जर्मनी ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए काम करने वाली यूएन एजेंसी यानी UNRWA की फंडिंग भी रोकी है, जिससे वह नरसंहार रोकने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने में विफल रहा है। यह पूरा कानूनी विवाद दक्षिण अफ्रीका द्वारा इजरायल के खिलाफ शुरू किए गए मुख्य नरसंहार मामले से जुड़ा हुआ है।

जर्मनी की तरफ से क्या दलीलें दी गईं

जर्मनी के विदेश मंत्रालय की तरफ से पेश कानूनी सलाहकार जूलिया मोनार ने अदालत के जजों के सामने अपना पक्ष रखा और निकारागुआ के सभी आरोपों को खारिज करने की अपील की। जूलिया मोनार ने इन तमाम आरोपों को बेहद गलत और तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया बताया। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इस मामले को कोर्ट में दायर करने से पहले निकारागुआ ने जरूरी कानूनी और प्रक्रियात्मक कदमों का पालन नहीं किया। इसके अलावा उन्होंने यह भी साफ किया कि साल 2024 के बाद से जर्मनी ने गाजा संघर्ष में इस्तेमाल के लिए इजरायल को किसी भी तरह के युद्धक हथियारों के निर्यात की अनुमति नहीं दी है।

आगे की अदालती कार्यवाही और समयसीमा

भले ही इस पूरी कानूनी प्रक्रिया में इजरायल सीधे तौर पर पक्षकार नहीं है, लेकिन उसका यह साफ कहना है कि उसकी सेना केवल हमास को निशाना बना रही है। इजरायल ने नरसंहार के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह से राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। वर्तमान में जर्मनी अधिकार क्षेत्र और स्वीकार्यता के आधार पर इस पूरे मामले को अदालत से बाहर करने की मांग कर रहा है। इन शुरुआती आपत्तियों पर अदालत का फैसला इसी साल आने की उम्मीद जताई गई है, हालांकि इस मामले के किसी अंतिम फैसले तक पहुंचने में कई साल लग सकते हैं और यह संभावित रूप से वर्ष 2029 तक खिंच सकता है। इस मामले की अगली कड़ी में निकारागुआ को 8 सितंबर 2026 को अदालत के सामने अपने तर्क रखने थे ताकि यह मुकदमा आगे बढ़ सके, जबकि यह पूरी सुनवाई 10 सितंबर 2026 तक चलने वाली है।

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