Saudi Arabia: Ghazipur के प्रवासी मजदूर की संदिग्ध हालत में मौत, परिवार कर रहा शव का इंतज़ार.

सऊदी अरब से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है जहाँ उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले एक भारतीय प्रवासी मजदूर की काम के दौरान अचानक मौत हो गई। शुरुआती रिपोर्ट्स में मौत की वजह संदिग्ध हार्ट अटैक बताई जा रही है जिससे पूरे परिवार में मातम पसर गया है और घर के लोग रो-रोकर बेहाल हैं। विदेश में अपनों को खोने का यह दर्द ऐसा है जिसे बयां करना बेहद मुश्किल होता है और अब परिवार किसी तरह अपने लाल के पार्थिव शरीर के भारत आने का इंतजार कर रहा है।
कौन थे मृतक और क्या था पूरा मामला
मिली जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान Dinesh Giri के रूप में हुई है जिनकी उम्र 45 वर्ष थी और वह उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के भुड़कुड़ा कोतवाली क्षेत्र के चक फात्मा उर्फ बैरख गांव के रहने वाले थे। वह रोजी-रोटी की तलाश में सऊदी अरब गए थे और गत 31 अगस्त की रात को अपनी ड्यूटी के दौरान ही उनका इंतकाल हो गया। इस भयंकर हादसे की खबर कंपनी के एक सुपरवाइजर ने फोन करके दिनेश गिरी की पत्नी Shashikala को दी जिसके बाद से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक अपने पीछे अपनी पत्नी और दो बेटों को रोता-छोड़ गए हैं जिनका अब इस दुनिया में उनके सिवा कोई और सहारा नहीं बचा है।
शव को वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया
फिलहाल दिनेश गिरी का शव सऊदी अरब में ही मौजूद है जहाँ स्थानीय अधिकारी पोस्टमार्टम की प्रक्रिया और अन्य जरूरी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने में जुटे हुए हैं। जब यह मेडिकल और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तभी शव को भारत वापस भेजने यानी रिपैट्रिएशन की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि अभी तक कंपनी के नाम और उस खास सऊदी शहर का खुलासा नहीं किया गया है जहाँ वह नौकरी करते थे लेकिन शुरुआती तौर पर इसे प्राकृतिक मौत माना जा रहा है जिसकी अंतिम मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
भारतीय दूतावास के नियम और प्रक्रिया
रियाद स्थित Indian Embassy के नियमों के अनुसार पार्थिव शरीर को देश वापस लाने में कई तरह के कागजी कदम उठाने होते हैं। इसमें सऊदी सिविल अफेयर्स से मृत्यु प्रमाण पत्र लेना, अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट और जरूरत पड़ने पर पुलिस रिपोर्ट शामिल होती है। प्रशासनिक कामकाज जैसे अंतिम एग्जिट की औपचारिकताएं और भारतीय मिशन से एनओसी हासिल करना स्पॉन्सर की जिम्मेदारी होती है जिसके लिए मृतक के परिवार के करीबी सदस्य की सहमति जरूरी होती है। आमतौर पर किसी प्राकृतिक मौत के मामले में शव वापस आने में दो से तीन हफ्ते का समय लग जाता है, हालांकि यह स्थानीय अधिकारियों की मंजूरी और एयरलाइंस कार्गो की व्यवस्था पर भी निर्भर करता है।
परिवार के लिए जरूरी सलाह और मदद
परिजनों को सलाह दी जाती है कि वे मृतक के पासपोर्ट, इकामा, रोजगार अनुबंध और मौत से जुड़े सभी कागजातों की प्रतियां सुरक्षित अपने पास रखें। शव के अलावा परिवार को बकाया वेतन, ग्रेच्युटी, सेवा समाप्ति के लाभ और बीमा के पैसे केSettlement के बारे में भी कंपनी से जानकारी लेनी चाहिए। यदि स्पॉन्सर की तरफ से किसी भी तरह की परेशानी पैदा की जाती है तो परिवार वाले रियाद स्थित भारतीय दूतावास से उनके 24 घंटे चलने वाले हेल्पलाइन नंबर +966-11-4884697, टोल-फ्री नंबर 800 247 1234 या फिर ईमेल आईडी [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा जरूरतमंद परिवारों को मामले के हिसाब से Indian Community Welfare Fund (ICWF) के जरिए वित्तीय सहायता भी मिल सकती है, जबकि प्रवासी भारतीय बीमा योजना यानी PBBY मुख्य रूप से हादसे में मौत या फिर स्थाई विकलांगता के मामलों में ही कवर देती है।