UNHRC में एशिया के अल्पसंख्यक अधिकारों पर प्रदर्शनी शुरू, पाकिस्तान और चीन के मामलों का खुलासा.

ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस यानी GHRD ने जिनेवा के पैलेस डेस नेशंस में "The Struggle for Minority Rights in Asia" नाम से एक खास प्रदर्शनी शुरू की है। यह आयोजन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद यानी UNHRC के 63वें सत्र के दौरान हो रहा है। इस प्रदर्शनी की शुरुआत 21 सितंबर 2026 को हुई और इसका मुख्य उद्देश्य एशिया भर के कई हाशिए पर मौजूद समुदायों द्वारा झेले जा रहे कथित अधिकारों के हनन और भेदभाव को दुनिया के सामने लाना है।
प्रदर्शनी का समय और उद्देश्य
यह चल रहा कार्यक्रम 7 सितंबर से लेकर 9 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले UNHRC सत्र के साथ ही आयोजित किया जा रहा है। इसे विशेष रूप से राजनयिकों, प्रतिनिधियों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और मान्यता प्राप्त आगंतुकों के लिए प्रस्तुत किया गया है। GHRD के अनुसार, इस प्रदर्शनी में बचे हुए लोगों की गवाही, फोटो के जरिए दस्तावेज और स्वतंत्र रूप से सत्यापित मामलों के अध्ययन का उपयोग किया गया है। इसके जरिए जबरन गायब किए जाने, धार्मिक असहिष्णुता और सामाजिक-राजनीतिक बहिष्कार जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया जा रहा है। इस पहल का मकसद उन समुदायों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करना है जिन्हें अक्सर वैश्विक मानवाधिकार चर्चाओं में कम जगह मिलती है।
किन समुदायों के मामलों को किया गया शामिल
इस प्रदर्शनी में जिन खास मामलों को जगह मिली है, उनमें पाकिस्तान में अहमदिया, ईसाई, सिंधी और बलूच समुदाय के साथ-साथ श्रीलंका का तमिल समुदाय भी शामिल है। इसके अलावा दस्तावेजों में बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समूहों और चीन के उइगर तथा फालुन गोंग समुदायों को भी कवर किया गया है। GHRD ने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रस्तुति का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर कथित मानवाधिकारों के हनन को औपचारिक रूप से दर्ज करने के महत्व को रेखांकित करना है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप ANI News की रिपोर्ट देख सकते हैं।