बंकर फ्यूल की भारी कमी का अनुमान, साल 2026 की तीसरी तिमाही में आ सकता है बड़ा संकट.

Praggya Singh sabal7 September 20263 min read62 viewsFinance
बंकर फ्यूल की भारी कमी का अनुमान, साल 2026 की तीसरी तिमाही में आ सकता है बड़ा संकट.

दुनियाभर में समुद्री जहाजों के लिए इस्तेमाल होने वाले बंकर फ्यूल की भारी कमी आने वाली है। एनर्जी कंसल्टेंसी Energy Aspects की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 की तीसरी तिमाही में रोजाना 218,000 बैरल की कमी देखने को मिल सकती है। यह स्थिति साल 2025 की तीसरी तिमाही के बाद सबसे बड़ा सप्लाई संकट साबित होगी। इस संकट के पीछे मुख्य वजह अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ चल रहा युद्ध और रूस-यूक्रेन की लड़ाई है। इन संघर्षों की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है और रिफाइनिंग क्षमता भी प्रभावित हुई है। सुरक्षा खतरों के चलते जहाजों को लाल सागर और बाब अल-मन्देब जलडमरूमध्य से दूर लंबे रास्तों पर चलना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और ज्यादा बढ़ गई है।

रिफाइनरियों की प्राथमिकता और चीन का फैसला

दुनियाभर की रिफाइनरियां इस समय डीजल, गैसोलीन और जेट ईंधन जैसे ज्यादा मुनाफा देने वाले उत्पादों के उत्पादन पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। ऐसा रिकॉर्ड स्तर पर कम इन्वेंट्री और ज्यादा मुनाफे के कारण हो रहा है। इसके अलावा, चीन ने अपने घरेलू स्टॉक को मजबूत करने के लिए अपनी रिफाइनिंग क्षमता और निर्यात को कम कर दिया है। यही वजह है कि सिंगापुर, फुजैराह और एम्स्टर्डम-रॉटरडम-एंटवर्प जैसे बड़े बंदरगाहों पर फ्यूल ऑयल का स्टॉक उनके तीन साल के औसत से 30 प्रतिशत नीचे चल रहा है। दुनिया के मुख्य बंकर हब सिंगापुर में, बहुत कम सल्फर वाले फ्यूल ऑयल यानी VLSFO की कीमतें ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से 76 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। 1 सितंबर तक यह कीमत लगभग 825 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

हार्मोन जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोन में भू-राजनीतिक तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने यह बयान दिया है कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए यह रास्ता खुला रहेगा, लेकिन अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों को यहां से गुजरने नहीं दिया जाएगा। ईरान जल्द ही एक नए प्रतिबंधित नौवहन गलियारे का नक्शा जारी करने वाला है। इस स्थिति को और गंभीर बनाते हुए ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Qalibaf ने चेतावनी दी है कि अगर वाशिंगटन ने ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला किया, तो खाड़ी में मौजूद अमेरिकी ऊर्जा संपत्तियों को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर हमारे यहां हमला हुआ तो आपको भी जवाब मिलेगा।

अमेरिका की कड़ी चेतावनी और वैश्विक व्यापार पर असर

इस धमकी के जवाब में अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth और CENTCOM कमांडर एडमिरल Brad Cooper ने कड़ी चेतावनियां जारी की हैं। एडमिरल ब्रैड कूपर ने साफ कहा है कि अगर ईरानी जहाजों की तरफ से अमेरिकी जहाजों पर कोई भी हमला होता है, तो अमेरिका ईरान के सीमित और खुले तेल बेड़े को पूरी तरह से नष्ट करने के लिए तैयार है। बाजार के विश्लेषकों जैसे Rystad की Valerie Panopio और Energy Aspects के Royston Huan का मानना है कि तीसरी तिमाही के दौरान सप्लाई की स्थिति बेहद तंग बनी रहेगी। बंकर फ्यूल की कीमतें बढ़ने की वजह से वैश्विक फ्रेट दरों में भी बढ़ोतरी होने की आशंका है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्थिरता पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है, खासकर एशिया में जो खाड़ी देशों से मिलने वाले ईंधन पर बहुत ज्यादा निर्भर है।

Share:

Comments

Leave a comment