मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच 2026 में ग्लोबल कमोडिटी कीमतें 23 फीसदी तक बढ़ सकती हैं
वर्ल्ड बैंक के अनुसार मिडिल ईस्ट संघर्ष और मौसम के जोखिम से 2026 में ग्लोबल कमोडिटी कीमतें 23% तक बढ़ सकती हैं।

नई दिल्ली: वर्ल्ड बैंक ग्रुप ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और तेल व अनाज की सप्लाई में बाधा आने से साल 2026 में ग्लोबल कमोडिटी कीमतें 23 फीसदी तक बढ़ सकती हैं। बैंक के मुताबिक ऊर्जा की कीमतों में 32 फीसदी की भारी उछाल आने की संभावना है, जबकि खेती के उत्पादन पर मौसम के जोखिम का खतरा मंडरा रहा है।
वर्ल्ड बैंक के लेटेस्ट कमोडिटी मार्केट्स आउटलुक के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 2025 में 69 डॉलर प्रति बैरल रहने के बाद 2026 में बढ़कर 91 डॉलर तक पहुंच सकती है। हालांकि, 2027 में इसमें कुछ कमी आने और कीमतों के 79 डॉलर तक गिरने का अनुमान है। कुल मिलाकर कमोडिटी की कीमतों में 2027 तक 7 फीसदी की गिरावट आ सकती है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि तेल के भंडार कम होने की वजह से वैश्विक बाजार सप्लाई में आने वाली किसी भी बाधा के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। 2026 में वैश्विक तेल आपूर्ति में 5.2 फीसदी की गिरावट आ सकती है, जो 2020 की वैश्विक मंदी के बाद चार दशकों में सबसे बड़ी गिरावट होगी। वहीं, खपत में 2.5 फीसदी की कमी आने की उम्मीद है।
खपत में इस कमी के पीछे उच्च कीमतें और चीन जैसे देशों में इलेक्ट्रिफिकेशन का असर बताया गया है। इसके बावजूद उत्पादन, खपत से कम रहने की उम्मीद है, जिससे तेल स्टॉक से और अधिक निकासी करनी पड़ेगी।
वर्ल्ड बैंक के डिप्टी चीफ इकोनॉमिस्ट और प्रॉस्पेक्ट्स ग्रुप के डायरेक्टर आयहान कोसे ने कहा कि कमोडिटी बाजार एक साथ कई बड़े झटकों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऊर्जा की बढ़ती लागत और व्यापार में बाधाओं से महंगाई, खाद्य असुरक्षा और आर्थिक विकास पर बुरा असर पड़ सकता है।
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 2026 में करीब 10 फीसदी और 2027 में 7 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है, जिससे कुल वृद्धि 18 फीसदी तक पहुंच जाएगी। अनाज की शिपमेंट में रुकावट, एल नीनो का खतरा और ईंधन व उर्वरकों की बढ़ती लागत से खेती और भोजन की उपलब्धता पर दबाव पड़ेगा। उर्वरक की कीमतें 2026 में 14 फीसदी बढ़ सकती हैं।
मेटल की कीमतों में रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहनों और डेटा सेंटर्स की मांग के कारण 2026 में 25 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, भू-राजनीतिक और नीतिगत अनिश्चितताओं के बीच कीमती धातुओं की कीमतों में 40 फीसदी उछाल आने का अनुमान है।
रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि यदि मिडिल ईस्ट संघर्ष बढ़ता है या रूसी तेल बुनियादी ढांचे को और नुकसान पहुंचता है, तो कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं। एक प्रतिकूल स्थिति में ब्रेंट क्रूड 2027 तक औसतन 105 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है और खाद्य वस्तुओं की कीमतें 2022 के स्तर को पार कर सकती हैं।
बढ़ती कीमतों के प्रभाव को संभालने के लिए वर्ल्ड बैंक ग्रुप ने मौजूदा फाइनेंसिंग टूल्स के जरिए 50 अरब से 60 अरब डॉलर उपलब्ध कराए हैं, जिसमें 25 अरब डॉलर की प्री-अरेंज्ड फाइनेंसिंग शामिल है।