वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया: होर्मुज़ में तेल आपूर्ति हुई बाधित

रियाद: अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने दुनिया के वैश्विक ऊर्जा संकट को और गंभीर बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इसे अब तक का सबसे बड़ा तेल आपूर्ति व्यवधान बताया है। एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फ़ातिह बिरोल के अनुसार दुनिया को हर दिन लगभग 13 मिलियन बैरल तेल का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सोचिए, दुनिया की 81 प्रतिशत ऊर्जा ज़रूरत आज भी जीवाश्म ईंधन से पूरी होती है। ऐसे में एक बड़ा झटका पूरी अर्थव्यवस्था को हिला सकता है, और अभी यही हो रहा है।
IEA ने मार्च में 400 मिलियन बैरल तेल जारी किया था और अब 100 मिलियन बैरल कच्चे तेल और डीज़ल की अतिरिक्त रिलीज़ की तैयारी है। लेकिन बिरोल का साफ़ कहना है कि लंबे समय का असली हल होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना ही है। इसी रास्ते से आम तौर पर लगभग 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद गुज़रते हैं, और इस समय उनका प्रवाह रुका हुआ है।
हालात को और खतरनाक बनाने वाली घटना 11 अक्टूबर 2026 को सामने आई। होर्मुज़ के पास पलाउ झंडे वाले तेल टैंकर "स्काईलाइट" पर हमला हुआ, जिसमें आग लग गई और चार चालक दल के सदस्य घायल हो गए। 28 फ़रवरी 2026 को संयुक्त अमेरिकी-इज़राइली अभियान शुरू होने के बाद व्यावसायिक जहाज़ पर यह पहला पुष्ट हमला माना जा रहा है।
पानी पर कब्ज़े की खींचतान और बाज़ार का डर
उसी दिन ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि अमेरिकी-इज़राइली हमलों से ऊर्जा ढांचे को गंभीर पर्यावरणीय खतरा पैदा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने भी इस चिंता का समर्थन किया है। दूसरी तरफ़ रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर के सलाहकार मोहम्मद रज़ा नक़दी ने चेतावनी दी कि किसी भी नई उकसावे की कार्रवाई पर उससे भी भारी जवाब मिलेगा। उनका दावा है कि होर्मुज़ पर ईरान का नियंत्रण है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 10 अक्टूबर को कहा था कि ईरान ने जलमार्ग पर नियंत्रण खो दिया है और तेल का प्रवाह स्थिर हो गया है। लेकिन बाज़ार की तस्वीर इससे अलग दिखती है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) ने 2026 और 2027 के लिए तेल कीमतों का अनुमान बढ़ा दिया है, क्योंकि वैश्विक भंडार घट रहे हैं और परिवहन में लगातार दिक्कतें बनी हुई हैं।
इसके अलावा लाल सागर में हूती विद्रोहियों के पाइपलाइनों पर हमलों और सऊदी शिपमेंट पर दबाव ने भी तनाव बढ़ाया है। अमेरिकी सैन्य रिपोर्टों के मुताबिक़ 8 और 9 अक्टूबर को ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर बड़े पैमाने के हमलों की तैयारी के संकेत मिले थे।
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