गाजा मामले में अंतरराष्ट्रीय कानून: क्या दुनिया दिखा रही है दोहरे मापदंड?

Gautam Sahu1 October 20262 min read0 viewsWorld
गाजा मामले में अंतरराष्ट्रीय कानून: क्या दुनिया दिखा रही है दोहरे मापदंड?

दुनिया भर के विशेषज्ञों और संयुक्त राष्ट्र (UN) के नेताओं के बीच इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या गाजा में अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करते समय 'दोहरे मापदंड' अपनाए जा रहे हैं। सितंबर और अक्टूबर 2026 के दौरान हुए वैश्विक विमर्श में यह सवाल प्रमुखता से उभरा है कि क्या कानून सभी के लिए समान है या यह केवल भू-राजनीतिक हितों से प्रेरित है।

कानूनी ढांचे और नागरिक सुरक्षा पर सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान कानूनी व्यवस्था, विशेष रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के नियम, नागरिकों की सुरक्षा करने में पूरी तरह सक्षम नहीं हैं। दोहा डिबेट्स पॉडकास्ट के दौरान प्रोफेसर बालकृष्णन राजगोपाल ने तर्क दिया कि जिनेवा कन्वेंशन जैसे नियम नागरिकों के घरों को केवल 'संपत्ति' के रूप में देखते हैं, जबकि वे उनके लिए सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व रखते हैं।

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प्रोफेसर मुकेश कपिला ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि गाजा, यूक्रेन, सूडान और ईरान जैसे देशों में अंतरराष्ट्रीय कानून का अलग-अलग तरीके से लागू होना यह दर्शाता है कि नियम सिद्धांतों के बजाय भू-राजनीति (Geopolitics) से संचालित हो रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में गूंजा मुद्दा

81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान यह मुद्दा केंद्र बिंदु बना रहा। यहाँ विभिन्न नेताओं ने अपनी अलग-अलग राय रखी:

  • महमुद अब्बास: फिलिस्तीनी राष्ट्रपति ने गाजा की स्थिति को 'नरसंहार का युद्ध' करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
  • एंटोनियो कोस्टा: यूरोपीय संघ परिषद के अध्यक्ष ने दोहरे मापदंडों के खिलाफ चेतावनी दी, हालांकि उन्होंने ICC और ICJ का बचाव भी किया।
  • सर्गेई लावरोव: रूसी विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि पश्चिमी देशों की राजनीति वैश्विक व्यवस्था को अस्थिर कर रही है।
  • हिंद अब्दुल रहमान अल-मुफ्ताह: कतर की UN प्रतिनिधि ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में विश्वास बहाली के लिए कानून के चयनात्मक प्रवर्तन (Selectivity) को समाप्त करना होगा।

विवाद के केंद्र में फ्रांस और इजरायल

कानूनी निष्पक्षता का विवाद केवल युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय नीतियों तक भी फैल गया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने फ्रांस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। संस्था का कहना है कि एक तरफ फ्रांस रोहिंग्या नरसंहार मामले में कानूनी रूप से सक्रिय है, वहीं दूसरी तरफ उसने बेंजामिन नेतन्याहू के विमान को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति दी, जबकि उनके खिलाफ ICC वारंट जारी है।

दूसरी ओर, जेरूसलम इंस्टीट्यूट ऑफ जस्टिस (JIJ) ने अपनी 48 पन्नों की रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र जांच आयोग पर ही निशाना साधा है। JIJ का आरोप है कि आयोग इजरायल के खिलाफ पक्षपाती है और वह इजरायली स्पष्टीकरणों को नजरअंदाज करते हुए केवल फिलिस्तीनी स्रोतों पर निर्भर रहता है।

निष्कर्ष: क्या कानून निष्पक्ष है?

यूएन की विशेष रिपोर्टर फ्रांसेस्का अल्बानेसे ने भी इस बात की ओर इशारा किया है कि यूक्रेन संघर्ष के प्रति अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया गाजा की तुलना में कहीं अधिक मजबूत दिखाई देती है। ऐसे में, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के मूल सिद्धांतों—जैसे कि अंतर (Distinction) और आनुपातिकता (Proportionality)—के निष्पक्ष क्रियान्वयन पर वैश्विक बहस जारी है।

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