संयुक्त राष्ट्र विकास घोषणा के 40 साल बाद भी दुनिया में असमानता और गरीबी बरकरार.

Praggya Singh sabal24 September 20263 min read6 viewsWorld
संयुक्त राष्ट्र विकास घोषणा के 40 साल बाद भी दुनिया में असमानता और गरीबी बरकरार.

संयुक्त राष्ट्र आमसभा द्वारा विकास के अधिकार संबंधी घोषणा को अपनाए जाने के पूरे चालीस साल बीत चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद दुनिया भर में गहरी असमानता आज भी लाखों लोगों की तरक्की में बड़ी बाधा बनी हुई है। इस अहम मुद्दे पर चर्चा के लिए 23 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने खुलकर बात रखी। इस बैठक में बताया गया कि कैसे दुनिया भर में चल रहे युद्ध, असमान वित्तीय व्यवस्था और भू-राजनीतिक उथल-पुथल इन दूरियों को और ज्यादा बढ़ा रहे हैं। साल 1986 की इस घोषणा में विकास को एक बुनियादी मानवाधिकार माना गया था, लेकिन आज भी हालात में बहुत बड़ा सुधार देखने को नहीं मिला है।

कल्याणकारी योजनाओं और फंडिंग की भारी कमी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा 23 सितंबर 2026 को जारी की गई एक नई रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि सामाजिक विकास के रास्ते में आने वाली रुकावटों को दूर करने के लिए लगातार और पक्के पैसों की मदद की जरूरत है। आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 में विकासशील देशों में सामाजिक सुरक्षा कवरेज केवल 49.7 प्रतिशत थी, जबकि विकसित देशों में यह आंकड़ा बढ़कर 89.5 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इस बड़े अंतर से साफ पता चलता है कि गरीब और विकासशील देशों के आम नागरिकों को अभी भी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा पाने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ रहा है। अल जजीरा के पत्रकार मोहम्मद कासिम ने इन गहरी व्यवस्थागत समस्याओं पर रोशनी डाली और ईरान, सीरिया तथा केन्या जैसे देशों के सामने आ रही गंभीर चुनौतियों का जिक्र किया।

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वैश्विक स्तर पर गहराता अविश्वास और तनाव

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 22 सितंबर 2026 को आमसभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए दुनिया को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर दूरियां लगातार बढ़ रही हैं और लोगों का आपसी भरोसा तेजी से कम हो रहा है। उन्होंने आर्थिक निष्पक्षता, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी कार्रवाई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सुरक्षा के लिए सभी देशों से मिलकर काम करने की जोरदार अपील की। इसके अलावा, इस वैश्विक मंच पर राजनीतिक तनाव भी साफ तौर पर दिखाई दिया जब दुनिया भर के बड़े नेता अपनी-अपनी बात रखने के लिए सामने आए।

ईरान और सीरिया के नेताओं का तीखा रुख

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने 23 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करते हुए अमेरिका और इजराइल पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कसम खाई कि ईरान हर हाल में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा की रक्षा करेगा। इसी से जुड़ी खबरों में अल जजीरा ने बताया कि ईरान पर अमेरिकी विमानन प्रतिबंधों की वजह से वहां के लोगों को अब महंगे सड़क मार्ग से यात्रा करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर, सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने भी 23 सितंबर 2026 को फिर से साफ कर दिया कि गोलान हाइट्स हमेशा सीरिया का हिस्सा रहेगा और उन्होंने अपने देश के अंदर इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की।

संयुक्त राष्ट्र के भविष्य पर मंडराता खतरा

संयुक्त राष्ट्र की उप-महासचिव अमीना मोहम्मद ने पहले ही चेतावनी दी है कि संगठन के सामने फंडिंग की भारी कमी के कारण उसके विकास कार्यों पर अस्तित्व का बड़ा संकट मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि संयुक्त राष्ट्र जरूरतमंद और कमजोर आबादी की उम्मीदों पर खरा उतरने में नाकाम रहता है, तो आने वाले समय में इसका महत्व पूरी तरह से खत्म हो सकता है। दुनिया भर के आम लोगों को उम्मीद है कि वैश्विक नेता इन बहसों से आगे बढ़कर जमीन पर ठोस कदम उठाएंगे ताकि हर देश के नागरिक को एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य मिल सके।

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