UAE और Jordan पर ईरान का बड़ा हमला, अमेरिका के साथ जंग के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल

फारस की खाड़ी में हालात एक बार फिर से बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 2.5 प्रतिशत से ज्यादा का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। यह पूरी घटना 30 अगस्त 2026 को शुरू हुई थी जब अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने হরमुज जलडमरूमध्य के पास स्थित Larak Island पर दो ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाते हुए एक सटीक सैन्य हमला किया था। इस हमले के बाद से मध्य पूर्व में सुरक्षा के हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं और इसका सीधा असर आम नागरिकों तथा वहां रहने वाले प्रवासियों पर पड़ रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच क्यों बढ़ा तनाव
अमेरिकी सेना के प्रवक्ता Captain Tim Hawkins ने जानकारी दी थी कि यह ऑपरेशन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्स यानी IRGC की गतिविधियों को रोकने के लिए किया गया था, जो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन में समुद्री बारूदी सुरंगे बिछाने की तैयारी कर रहे थे। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले ही चेतावनी दी थी कि जो भी पोत नए माइंस लगाएगा उसे नष्ट कर दिया जाएगा। इस बीच Larak Island पर हुए शुरुआती अमेरिकी हमले में ईरानी सेना के कई जवान और कुछ आम नागरिक मारे गए या घायल हुए, जिसकी पुष्टि अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी Tasnim News Agency ने भी की थी। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस अमेरिकी कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2 के पैराग्राफ 4 का उल्लंघन बताया और राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता है लेकिन हर आक्रामकता का कड़ा जवाब दिया जाएगा।
ईरान का पलटवार और मिसाइल तथा ड्रोन हमले
अमेरिका की इस सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान के IRGC ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 की सुबह तड़के बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों की एक बड़ी लहर शुरू कर दी। ईरानी बलों ने सीधे तौर पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जिसमें जॉर्डन के किंग हुसैन और अल-अजराक़ एयर बेस के अलावा संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE का Al Minhad Air Base भी शामिल था। जॉर्डन की सशस्त्र सेना ने बयान जारी कर बताया कि उन्होंने अपनी सीमा के पास पहुंचने से पहले ही ईरान की आठ बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में सफलता पूर्वक नष्ट कर दिया था। इसके अलावा IRGC ने यह भी दावा किया कि उन्होंने हरमुज जलडमरूमध्य के ऊपर अमेरिका का एक MQ-9 Reaper drone भी मार गिराया है।
समुद्री व्यापार और शिपिंग पर इसका असर
इस ताजा सैन्य संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला कमर्शियल समुद्री ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित हुआ है और आवाजाही घटकर मात्र पांच जहाज प्रति दिन रह गई है। IRGC Navy ने एक चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि सभी जहाजों को गुजरने के लिए ईरानी सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। उनका यह भी कहना है कि हाल ही में एक तेल टैंकर दो नौसैनिक माइंस की चपेट में आने के बाद आग की आगोश में आ गया था। खाड़ी देशों में काम करने वाले कामगारों और भारत से आने-जाने वाले लोगों के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा चिंता का बड़ा विषय बन गई है क्योंकि इस उथल-पुथल से अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर सीधा असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।