पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यातकों के लिए बढ़ाई गई RELIEF योजना की समयसीमा

पश्चिम एशिया में लगातार जारी समुद्री लॉजिस्टिक्स की बाधाओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सरकार ने बढ़ते माल भाड़े, बीमा के भारी खर्च और युद्ध जैसे जोखिमों से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों को और मजबूत करते हुए एक अहम फैसला लिया है। वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यातकों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाते हुए समयसीमा में विस्तार कर दिया है, जिससे वैश्विक अनिश्चितता के दौर में देश का निर्यात प्रभावित न हो सके।
निर्यातकों के लिए क्या है खास?
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, यह विस्तार 'एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन' (EPM) के तहत आने वाली 'रेसिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन' यानी RELIEF योजना के कंपोनेंट II के अंतर्गत किया गया है। खाड़ी और उससे जुड़े समुद्री क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था बाधित होने से कारोबारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इस नई व्यवस्था के तहत सरकार का मुख्य जोर निर्यातकों को वित्तीय सुरक्षा और स्थिरता प्रदान करना है।
- 95 प्रतिशत तक जोखिम कवर: RELIEF योजना के कंपोनेंट II के तहत निर्यातकों को चुनिंदा क्षेत्रों में होने वाले शिपमेंट के लिए ईसीजीसी (ECGC) कवर लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिसमें 95% तक का जोखिम कवर मिलता है।
- बीमा प्रीमियम में कोई बढ़ोतरी नहीं: इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि संकट के इस दौर में भी पात्र अवधि के दौरान निर्यातकों को पूर्व-बाधा स्तर से ज्यादा प्रीमियम का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
- विभिन्न प्रकार के कार्गो शामिल: इस योजना के दायरे में फुल कंटेनर लोड (FCL), लेस दैन कंटेनर लोड (LCL) और रीफर कंटेनर शामिल किए गए हैं, हालांकि ऊर्जा से जुड़े शिपमेंट को इससे बाहर रखा गया है।
वैश्विक व्यापार को बनाए रखने की प्रतिबद्धता
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया के रास्ते में आने वाली रुकावटों के कारण शिपिंग और बीमा व्यवस्थाओं में भारी अनिश्चितता बनी हुई है। मार्च में शुरू की गई इस समयबद्ध RELIEF पहल का मुख्य उद्देश्य अत्यधिक फ्रेट किराए और युद्ध जैसे जोखिमों से जूझ रहे निर्यातकों को मजबूती देना है। सरकार के इस कदम से यह साफ है कि तमाम अंतरराष्ट्रीय बाधाओं के बावजूद देश के व्यापारिक प्रवाह को निरंतर बनाए रखने और निर्यातकों का हौसला बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।