सऊदी अरब और खाड़ी देशों में बड़ा हमला, ड्रोन और मिसाइल स्ट्राइक से मची खलबली.

खाड़ी देशों में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और रविवार, 13 सितंबर 2026 को इस क्षेत्र में कई जगहों पर हिंसक झड़पें और हमले देखने को मिले हैं। इस तनावपूर्ण स्थिति के कारण आम जनता के साथ-साथ वहां काम करने वाले प्रवासियों और भारत से आने-जाने वाले लोगों की चिंताएं भी काफी बढ़ गई हैं। लगातार हो रहे इन हमलों से पूरे इलाके में डर का माहौल बन गया है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से सतर्क हो गई हैं।
सऊदी अरब के सैन्य ठिकानों पर हमले
हुथी बलों ने दावा किया है कि उन्होंने ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल करके सऊदी अरब के शरौरा सैन्य बेस पर बड़ा हमला किया है। इस हमले में हथियारों के गोदामों और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया गया है। हुथी सैन्य प्रवक्ता यह्या सारी ने बताया कि यह कार्रवाई यमन पर किए गए सऊदी हवाई हमलों के जवाब में की गई है। इसके अलावा, सऊदी सिविल डिफेंस ने पुष्टि की कि शनिवार रात को जाज़ान के अल-तुवाल गवर्नरट में हुथी प्रोजेक्टाइल गिरने से दो लोग घायल हो गए। इस घटना में एक मस्जिद को नुकसान पहुंचा तथा कई घर और वाहन पूरी तरह तबाह हो गए। स्थिति को देखते हुए खमीस मुशाइत में भी सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया था जिसे बाद में हटा लिया गया।
समुद्री रास्तों और जहाजों पर संकट
जमीनी हमलों के अलावा समुद्री सुरक्षा भी गंभीर रूप से खतरे में पड़ गई है। यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी UKMTO ने रिपोर्ट दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय एक जहाज पर प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। इसके अलावा, ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि क्सम द्वीप के पास एक कमर्शियल जहाज पर भी हमला हुआ जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन लोग घायल हो गए। रात के समय क्सम द्वीप के आसपास कई धमाकों की आवाजें भी सुनी गईं।
बढ़ता विस्थापन और इंसानी नुकसान
जुलाई महीने में 2022 के युद्धविराम के टूटने के बाद से इस व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में भारी संख्या में लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के अनुसार, जुलाई से अब तक 76,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं, जिनमें से 1,400 लोग जिबूती पहुंच चुके हैं। जिबूती के वित्त मंत्री ने इन लोगों के आने की पुष्टि की है। संघर्ष में शामिल दोनों पक्षों का कहना है कि मरने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है और सूत्रों का अनुमान है कि लड़ाई दोबारा शुरू होने के बाद से 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हुथियों का दावा है कि उन्हें पिछले 48 घंटों में 129 सऊदी हवाई हमलों का सामना करना पड़ा है, जबकि उन्होंने मोचा और बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य के पास के मुख्य द्वीपों पर अपने नियंत्रण का दावा किया है।
कूटनीतिक प्रयास और कड़े राजनीतिक कदम
इस गंभीर संकट को सुलझाने के लिए चल रही कूटनीतिक कोशिशें फिलहाल ठप पड़ती नजर आ रही हैं। बहरीन ने ओमान में होने वाली निर्धारित बैठकों से आधिकारिक तौर पर अपना नाम वापस ले लिया है और साफ कह दिया है कि जब तक ईरान के साथ राजनायिक रिश्ते दोबारा नहीं सुधरते, तब तक वह उससे कोई बातचीत नहीं करेगा। हालांकि कतर और ओमान के बीच बातचीत का सिलसिला अभी जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पिछले हफ्ते अमेरिका से हुथियों के खिलाफ हमलों की मांग दो बार की थी, जिसे डोनाल्ड ट्रंप ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इस स्थिति का समाधान खुद-ब-खुद हो जाएगा। इस पूरे क्षेत्रीय संकट के कारण अब बाब अल-मंडब और होर्मुज के समुद्री रास्तों से होने वाले वैश्विक तेल परिवहन के बाधित होने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है।