खाड़ी में बढ़ता तनाव: संघर्ष के बीच 6 भारतीयों की मौत, एक लापता

खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष का खामियाजा अब निर्दोष भारतीय कामगारों को भुगतना पड़ रहा है। हाल ही में हुई हिंसा में छह भारतीय नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि एक व्यक्ति अभी भी लापता बताया जा रहा है। इस बढ़ते तनाव ने भारतीय प्रवासियों और समुद्री नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
दुखद घटना: ओमान के तट पर हुआ हादसा
इस संकटपूर्ण स्थिति में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले 26 वर्षीय सूरज यादव की मृत्यु एक बड़ी त्रासदी है। सूरज, जो कि एक वाइपर के रूप में काम करते थे, ओमान के मुसandam तट के पास 'MV Cape Dao' नामक मालवाहक जहाज पर सवार थे। बताया जा रहा है कि दो प्रोजेक्टाइल्स (गोले) लगने के कारण सिर में गंभीर चोट आने से उनकी जान चली गई।
दिल दहला देने वाली बात यह है कि सूरज ने 19 अगस्त को अपने पहले कॉन्ट्रैक्ट के लिए भारत छोड़ा था और जाने से पहले अपने परिवार से वीडियो कॉल पर बात की थी। हालांकि ओमान नौसेना ने जहाज पर मौजूद 19 अन्य भारतीय चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया है, लेकिन सूरज के पार्थिव शरीर को अभी तक उनके परिवार तक नहीं पहुँचाया जा सका है।
क्षेत्र में फंसे हजारों भारतीय नाविक
डाइरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र के समुद्री रास्तों में लगभग 23,000 भारतीय नाविक मौजूद हैं। इन यात्रियों का वितरण इस प्रकार है:
- UAE: 12,830 भारतीय
- Saudi Arabia: 3,131 भारतीय
- Qatar: 2,372 भारतीय
- Oman: 1,687 भारतीय
- Bahrain: 276 भारतीय
इनमें से 768 भारतीय चालक दल के सदस्य अभी भी 28 भारतीय झंडे वाले टैंकरों और मालवाहक जहाजों पर फंसे हुए हैं। इसके अलावा, होर्मुज के पश्चिम में भी कई भारतीय जहाजों पर सैकड़ों नाविक मौजूद हैं जो युद्ध की आशंका के बीच फंसे हुए हैं।
सरकार की कार्रवाई और सुरक्षा संबंधी मांगें
नई दिल्ली में आयोजित एक बैठक के दौरान, अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर. महाजन ने बताया कि सऊदी अरब, ओमान, इराक और UAE में स्थित भारतीय मिशन स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर लापता व्यक्ति को खोजने और मृतकों के पार्थिव शरीर को वापस लाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
इस बढ़ते खतरे को देखते हुए 'फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया' ने सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- एक स्थायी संकट सेल (Crisis Cell) का गठन किया जाए।
- व्यापारिक जहाजों को नौसेना का एस्कॉर्ट (सुरक्षा घेरा) प्रदान किया जाए।
- प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वे संबंधित देशों की सरकारों के संपर्क में हैं और जहाजों की स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रख रहे हैं। प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए भारतीय मिशनों ने 24 घंटे हेल्पलाइन भी जारी की है।