सऊदी अरब पर बड़ा हमला, खाड़ी देशों में कूटनीति फेल और तेल संकट से बढ़ी टेंशन.

Aanya15 September 20264 min read27 viewsSaudi
सऊदी अरब पर बड़ा हमला, खाड़ी देशों में कूटनीति फेल और तेल संकट से बढ़ी टेंशन.

खाड़ी देशों में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और क्षेत्रीय कूटनीति पूरी तरह से चरमरा गई है। ओमान की राजधानी में तेहरान और खाड़ी अरब देशों के बीच होने वाली एक अहम बैठक आखिरी समय में रद्द हो गई, जिससे तनाव और ज्यादा बढ़ गया है। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल्बुसैदी ने बताया कि आम सहमति बनाए रखने के लिए इस सोमवार की बैठक को आगे के लिए टाल दिया गया है। हालांकि, ईरान ने इस नाकामी के लिए सीधे तौर पर Saudi Arabia को जिम्मेदार ठहराया है। इस राजनीतिक हलचल के तुरंत बाद यमन के रास्ते से आए ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर ताबड़तोड़ मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।

सऊदी एयरबेस और शहरों पर जोरदार हमला

यमन की तरफ से आए हूथी लड़ाकों ने Khamis Mushait स्थित किंग खालिद एयर बेस को निशाना बनाते हुए दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे। इन हमलों में एयरबेस के hangars, radars, runways और ammunition depots को नुकसान पहुंचने की खबर है। सऊदी अधिकारियों ने देश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में तुरंत इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया। सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, खमीस मुशैत, अभहा और ताइफ में हुए इन हमलों की वजह से कुल 13 civilians घायल हो गए। इसके अलावा सात घरों और दो गाड़ियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिविल डिफेंस के अधिकारियों ने यानबू, जेद्दाह, जाज़ान और अल-उला तक में अलर्ट बढ़ा दिया था, जिसे बाद में हालात काबू में आने पर हटा लिया गया।

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यह पूरा सैन्य तनाव उस समय और भड़क गया जब हूथी विद्रोहियों ने हाल ही में बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के मुख्य बिंदुओं यानी मोखा बंदरगाह और पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया था। इसके अलावा, पिछले शुक्रवार को इराक की तरफ से आए एक ड्रोन ने सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को पूरी तरह से ठप कर दिया। इस घटना के बाद बाजार के जानकारों ने चेतावनी दी है कि इससे वैश्विक तेल आपूर्ति का 4% हिस्सा कम हो सकता है, जिसके चलते बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में 3% का बड़ा उछाल देखने को मिला है।

अंतरराष्ट्रीय दखल और अमेरिका की भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका का रुख फिलहाल सीमित नजर आ रहा है। रॉयटर्स को जानकारी देने वाले तीन सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हूथी विद्रोहियों के खिलाफ सीधे अमेरिकी सैन्य हमले की सऊदी अरब की मांग को ठुकरा दिया है। अमेरिका इसके बजाय सिर्फ खुफिया जानकारी और टारगेट करने में मदद दे रहा है। इसी सिलसिले में सोमवार को सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman ने जेद्दाह में CENTCOM प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर से मुलाकात की। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी बताया कि हूथी विद्रोहियों ने खुद अमेरिका से अपील की थी कि वह इस मामले में बीच में दखल न दे।

क्षेत्रीय स्तर पर देशों के बीच दूरियां साफ देखी जा सकती हैं। इससे पहले बहरीन ने ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत से साफ मना कर दिया था। हालांकि, UAE के उत्तराधिकारी खालिद बिन मोहम्मद अल नाहयान ने भारत में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से मुलाकात जरूर की थी, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्रीय स्तर पर कोई ठोस आम सहमति नहीं बन पाई है। दूसरी तरफ, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने दावा किया है कि पनामा के झंडे वाले टैंकर 'एल गैया' को प्रतिबंधित क्षेत्र में एक समुद्री बारूदी सुरंग ने टक्कर मारी थी। वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि जहाज पर पिछले महीने एक ईरानी मिसाइल से हमला किया गया था। इसके जवाब में ईरान ने 77 ऐसे जहाजों की सूची जारी की है जिन पर नियमों के उल्लंघन का आरोप है और उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद तथा अपने नियंत्रण में घोषित कर दिया है।

क्षेत्रीय अस्थिरता का यह पूरा दौर बीती 28 February को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से शुरू हुआ था। आने वाली 15 September 2026 तक इस संघर्ष का असर लगभग सभी जीसीसी राजधानियों पर साफ दिखाई दे रहा है, जहां यमन इस मौजूदा संकट के नए मोर्चे के रूप में उभर कर सामने आया है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और काम के सिलसिले में आने-जाने वाले लोगों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि तेल बाजार और सुरक्षा के हालात सीधे तौर पर आम जनजीवन को प्रभावित कर रहे हैं।

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