Gulf Crisis: अमेरिका और ईरान की लड़ाई से गल्फ देशों में मंदी, दुबई और कतर की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान.

Aanya4 September 20263 min read42 viewsUAE
Gulf Crisis: अमेरिका और ईरान की लड़ाई से गल्फ देशों में मंदी, दुबई और कतर की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान.

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण साल 2026 में गल्फ देशों की अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। इस संघर्ष की वजह से पूरे खाड़ी क्षेत्र में कारोबार और विकास धीमी गति से आगे बढ़ रहे हैं, जिससे आम जनता से लेकर बड़े कारोबारियों तक हर कोई परेशान नजर आ रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के वित्तीय तंत्र को कमजोर करने के लिए Operation Economic Outcast नाम से एक नया अभियान शुरू किया है, जिसका नेतृत्व सचिव Scott Bessent कर रहे हैं। इस सख्ती के चलते ईरान के व्यापार में 35% की भारी गिरावट आई है और वहां महंगाई दर लगभग 70% के करीब पहुंच गई है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सख्ती और जहाजों का डायवर्जन

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई लगातार जारी है, जिसके तहत ईरान से जुड़े 86 कमर्शियल जहाजों को ईरानी बंदरगाहों पर जाने से रोक दिया गया और उन्हें दूसरे रास्तों पर डायवर्ट किया गया। इस क्षेत्रीय अस्थिरता का सीधा असर ऊर्जा उत्पादन और बाजार के भरोसे पर पड़ रहा है। इस बारे में अधिक जानकारी अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट US Department of the Treasury पर दी गई है। लगातार जारी इस तनाव के कारण गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों और स्थानीय नागरिकों के रोजगार तथा कारोबार पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

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कतर और दुबई की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका

आर्थिक मंदी के इस दौर में कतर ने साल 2026 की पहली तिमाही में 7% की वार्षिक आर्थिक गिरावट दर्ज की है। वहीं दूसरी ओर, दुबई में पर्यटन और विमानन क्षेत्र पर इसका सबसे बुरा असर पड़ा है। साल की पहली छमाही के दौरान दुबई एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या में 31.3% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मिडिल ईस्ट की एयरलाइंस को साल 2026 में करीब 4.3 अरब डॉलर का शुद्ध घाटा होने की आशंका जताई जा रही है, जो कि साल 2025 में दर्ज किए गए 7.2 अरब डॉलर के मुनाफे के बिल्कुल विपरीत है।

होटल और पर्यटन उद्योग की स्थिति

एमिरेट्स के अध्यक्ष Tim Clark ने बताया कि एयरलाइन इस कठिन समय में यात्रियों का भरोसा बनाए रखने के लिए केवल सेवाओं की विश्वसनीयता और कस्टमर सपोर्ट पर पूरा ध्यान दे रही है, क्योंकि आसमान में उड़ान भरने पर कई तरह की पाबंदियां लगी हुई हैं। होटल बुकिंग और कमरे की ऑक्यूपेंसी में भी भारी गिरावट आई है। मार्च 2026 में दुबई के होटलों की बुकिंग में 54.4% की गिरावट आई और यह घटकर सिर्फ 33.1% पर आ गई, जबकि पूरे संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में होटलों की ऑक्यूपेंसी 49.3% घटकर 36.2% रह गई है।

बड़े खेल आयोजन रद्द और फॉर्मूला वन पर असर

इस तनावपूर्ण माहौल के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई बड़े खेल आयोजनों को भी रद्द करना पड़ा है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बहरीन और सऊदी अरब में होने वाली फॉर्मूला वन ग्रां प्री रेस को रद्द कर दिया गया। एफआईए (FIA) के अध्यक्ष Mohammed Ben Sulayem और फॉर्मूला वन के अध्यक्ष Stefano Domenicali ने सुरक्षा को ही सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया। इसके बाद बहरीन ग्रां प्री को मलेशिया के सेपांग में शिफ्ट किया गया, जबकि कतर और अबू धाबी में होने वाले आयोजनों पर भी रद्द होने का खतरा लगातार मंडरा रहा है।

दुबई सरकार का राहत पैकेज और भविष्य की चिंताएं

इस आर्थिक मंदी से निपटने के लिए दुबई सरकार ने 408 मिलियन डॉलर यानी करीब 40.8 करोड़ डॉलर का एक बड़ा प्रोत्साहन पैकेज जारी किया है। इस पैकेज के तहत होटलों और रेस्तरां के लिए टैक्स को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है, जिसे व्यापक UAE September reset का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार की तरफ से उठाए जा रहे इन कदमों के बावजूद कारोबारी अभी भी काफी डरे हुए हैं और फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। पर्यटन अर्थशास्त्र यानी Tourism Economics के अनुमान के मुताबिक, साल 2026 में इस क्षेत्र में आने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में 11% से 27% तक की भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। जानकारों का कहना है कि अगर लड़ाई आज ही थम जाए, तब भी इस अर्थव्यवस्था को पूरी तरह पटरी पर लौटने में काफी लंबा समय लगेगा।

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