खाड़ी देशों में नौकरी छूटने और कम वेतन से प्रवासी परेशान, सोशल मीडिया पर उठा रहे आवाज
सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देशों में प्रवासियों ने वेतन वृद्धि और नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है।

रियाद: खाड़ी देशों में काम कर रहे प्रवासियों, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, के बीच वेतन और नौकरी की स्थिरता को लेकर घबराहट बढ़ रही है। अपनी समस्याओं को लेकर लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X का सहारा ले रहे हैं और अपनी आवाज उठा रहे हैं।
6 नवंबर 2026 को सऊदी अरब में रहने वाले हाउस ड्राइवरों ने रियाद स्थित भारतीय दूतावास के आधिकारिक अकाउंट (@IndianEmbRiyadh) से वेतन वृद्धि की संभावनाओं के बारे में जानकारी मांगी। यह सवाल वेतन से जुड़ी बढ़ती चिंताओं के बीच सामने आया है।
ऑनलाइन चर्चाओं में केवल वेतन ही नहीं, बल्कि व्यवस्थागत खामियों पर भी बात हो रही है। कई प्रवासियों ने बताया कि कंपनियों के बंद होने की वजह से अचानक रेजिडेंसी वीजा रद्द किए जा रहे हैं, जिससे कर्मचारियों को तुरंत देश छोड़कर जाना पड़ रहा है।
इसके अलावा, लोग कफाला जैसी लेबर स्पॉन्सरशिप प्रणालियों से जुड़ी चुनौतियों और क्षेत्र में लंबे समय तक रहने की सीमित संभावनाओं का जिक्र कर रहे हैं। यह स्थिति सऊदीकरण (Saudization) और अमीरातीकरण (Emiratisation) जैसी बदलती श्रम नीतियों के बीच पैदा हुई है, जिसका असर घरेलू कामगारों और कम कुशल भूमिकाओं पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि कर्मचारियों को अपने रोजगार अनुबंधों के दस्तावेजों को संभाल कर रखना चाहिए। साथ ही, समस्याओं के समाधान के लिए दूतावास की हेल्पलाइन और स्थानीय श्रम अदालतों जैसे आधिकारिक माध्यमों का उपयोग करना चाहिए।
वेतन वृद्धि से जुड़े विशिष्ट सवालों पर अभी आधिकारिक जवाब मिलना बाकी है। हालांकि, इस पूरे विवाद ने वेतन सुरक्षा और अचानक नौकरी छूटने पर श्रमिकों के लिए सहायता तंत्र की जरूरत को उजागर कर दिया है। सामुदायिक पर्यवेक्षक अब श्रम अनुपालन और दूतावास की संभावित एडवाइजरी पर नजर रख रहे हैं।