सऊदी-यूएई में भारतीय मजदूरों ने X पर उठाए वेतन में भेदभाव और वसूली के मुद्दे
सऊदी अरब और यूएई में काम कर रहे भारतीय समेत कई प्रवासियों ने वेतन विसंगतियों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर अपनी आवाज उठाई है।

दुबई/रियाद: सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में काम कर रहे भारतीय समेत कई प्रवासी श्रमिकों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी गंभीर समस्याएं साझा की हैं। पिछले 48 घंटों में बड़ी संख्या में प्रवासियों ने वहां की श्रम प्रथाओं और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर अपनी नाराजगी जताई है।
श्रमिकों ने मुख्य रूप से वेतन में समानता न होने और लेबर एक्सटॉर्शन (मजदूरी के नाम पर वसूली) जैसे मुद्दों को उठाया है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण दुबई और पूरे यूएई में दैनिक जीवन और सुरक्षा पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
ओमान में एक जहाज से जुड़ी हालिया घटना के बाद तट पर काम करने वाले मजदूरों और नाविकों के बीच घबराहट देखी गई है। क्षेत्रीय संघर्ष के बढ़ने के डर से कई प्रवासी अब इस क्षेत्र में यात्रा करने या नए नौकरी के प्रस्तावों को स्वीकार करने पर दोबारा विचार कर रहे हैं।
श्रम अधिकारों पर नजर रखने वाले जानकारों के मुताबिक, सऊदी अरब और यूएई में हालिया सुधारों से श्रमिकों की आवाजाही में तो आसानी हुई है, लेकिन वेतन संरक्षण प्रणालियों (WPS और Mudad) के कार्यान्वयन में अब भी बड़ी कमियां हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि सोशल मीडिया शिकायतों को दर्ज करने का एक जरिया तो है, लेकिन यहां बिना पुष्टि वाली जानकारियां भी फैलती हैं, इसलिए सरकारी चैनलों पर भरोसा करना जरूरी है। भारतीय राजनयिक मिशन और श्रम अधिकारी प्रवासियों के कल्याण से जुड़ी स्थितियों की निगरानी कर रहे हैं।
विवादों के समाधान के लिए हितधारकों को किवा (Qiwa), MOHRE जैसे आधिकारिक पोर्टल और दूतावास की हेल्पलाइन का उपयोग करने की सलाह दी गई है। 4 नवंबर 2026 तक सऊदी मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्रालय (MHRSD), यूएई मंत्रालय (MOHRE) और भारतीय वाणिज्य दूतावासों की ओर से इन शिकायतों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।