खाड़ी देशों में फंसे प्रवासी मजदूरों पर मंडराया खतरा, HRW ने जताई चिंता
ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक खाड़ी देशों में भारतीय समेत लाखों प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और कमाई पर संकट गहराया है।

जेनेवा: खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों में काम कर रहे लाखों प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनकी रोजी-रोटी पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि क्षेत्रीय संघर्षों के बीच इन मजदूरों के लिए शारीरिक और आर्थिक जोखिम काफी बढ़ गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान जैसे देशों से गए मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यूएई और बहरीन जैसे देशों में संघर्ष के कारण मजदूरों के घायल होने और उनकी मौत के मामले सामने आए हैं।
आर्थिक मोर्चे पर हालात और भी खराब हैं। कमीशन आधारित काम करने वाले मजदूरों की कमाई में भारी गिरावट आई है, जबकि खाद्य पदार्थों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इस आर्थिक तंगी के बावजूद कई मजदूरों को अब भी अनिवार्य स्पॉन्सर फीस का बोझ उठाना पड़ रहा है।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि 'कफाला सिस्टम' इन मजदूरों की मुश्किलों को और बढ़ा रहा है। इस व्यवस्था के कारण मजदूरों की आवाजाही पर पाबंदी रहती है, जिससे तनाव बढ़ने पर उनके लिए संघर्ष प्रभावित इलाकों को छोड़कर जाना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा वेतन मिलने में देरी और आय की अस्थिरता का खतरा भी बना हुआ है।
संस्था ने खाड़ी देशों की सरकारों और नियोक्ताओं से मांग की है कि वे आपातकालीन मुआवजे के उपाय लागू करें और श्रम अनुबंधों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। अधिकार समूहों ने यह भी बताया कि संघर्ष ने इन खतरों को तेज जरूर किया है, लेकिन इनकी जड़ें पहले से मौजूद ढांचागत समस्याओं में हैं।
रिपोर्ट में प्रवासी मजदूरों के मूल देशों के दूतावासों से भी अपील की गई है कि वे अपने नागरिकों की सक्रिय निगरानी करें और उन्हें जरूरी सहायता प्रदान करें। अब इस बात पर नजर रहेगी कि GCC के श्रम मंत्रालय और दूतावास इन सुरक्षा उपायों को लेकर क्या कदम उठाते हैं।