क्षेत्रीय युद्ध रोकने के लिए खाड़ी देशों ने ईरान के साथ बढ़ाए कूटनीतिक प्रयास
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई की खबरों के बीच सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के अधिकारियों ने ईरान में शांति वार्ता की।

तेहरान: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए खाड़ी देशों ने अपनी कूटनीतिक कोशिशें तेज कर दी हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका द्वारा ईरान पर सैन्य हमले किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं।
26 अक्टूबर 2026 को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के उच्च स्तरीय सुरक्षा अधिकारियों ने तेहरान में एक बैठक की। इस बैठक में सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्की के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन शामिल हुए।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ हुई इस मुलाकात में मक्का समझौते के ढांचे के तहत शांति को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय संघर्ष को रोकने पर चर्चा हुई। हालांकि, इस बैठक के दौरान किसी औपचारिक युद्धविराम या रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए, लेकिन सभी प्रतिभागियों ने बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
दूसरी ओर, 28 अक्टूबर 2026 को वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने कई खाड़ी अरब देशों को ईरान के खिलाफ एक संक्षिप्त और तीव्र सैन्य अभियान के लिए तैयार रहने की सलाह दी है। यह कार्रवाई 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद हो सकती है।
बताया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल के सैन्य योजनाकार ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे, परमाणु सुविधाओं और ड्रोन व मिसाइल क्षमताओं को निशाना बनाने वाले ऑपरेशनों पर विचार कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ समझौता संभव है, लेकिन चुनावों के बाद सैन्य कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।
तनाव कम करने के लिए राजनयिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं। 27 अक्टूबर 2026 को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलत्ती से फोन पर बात की। इसी दिन राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने मॉस्को में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से मुलाकात की, जहां कतर ने शांति प्रस्तावों का एक नया ड्राफ्ट पेश किया।
ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल बुसैदी ने ईरान सहित आठ राष्ट्रों के बीच एक खाड़ी गैर-आक्रामकता समझौते की वकालत की है। वहीं, मिस्र की संसद ने सऊदी अरब के लिए केवल रक्षात्मक सैन्य सहायता को मंजूरी दी है।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा का प्रबंधन बाहरी हस्तक्षेप के बिना स्थानीय स्तर पर किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने इस्लामी देशों के बीच एकता के महत्व पर जोर दिया, जबकि विदेश मंत्री अरागची ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय सुरक्षा की इन चर्चाओं में परमाणु मुद्दों को शामिल नहीं किया गया था।
इन तमाम कोशिशों के बावजूद क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है। सऊदी अरब ने पिछले 24 घंटों के भीतर हूती मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोकने की जानकारी दी है।