क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच बाहरी मदद कम कर सैन्य आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ रहे हैं खाड़ी देश
क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच GCC देश अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ा रहे हैं। कतर, सऊदी अरब और अन्य देश सैन्य उत्पादन और नए समझौतों पर ध्यान दे रहे हैं।

दौहा: खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देश साल 2026 में अपनी रक्षा क्षमताओं को खुद मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ने के कारण ये देश अब बाहरी सुरक्षा गारंटियों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं। फरवरी 2026 में ईरान के साथ शुरू हुए संघर्ष ने क्षेत्रीय सुरक्षा की कमियों को उजागर किया, जिसके बाद अब ये देश पारंपरिक गठबंधनों के साथ-साथ घरेलू क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में बढ़ रहे हैं।
इस बदलाव में कतर सबसे आगे है। अल जजीरा के सहयोगी अब्दुल्ला अल-इमादी ने रक्षा संप्रभुता हासिल करने के लिए पांच साल की रणनीति बताई है। इसके तहत एकीकृत वायु और मिसाइल रक्षा प्रणाली, एडवांस अर्ली वार्निंग सिस्टम और साइबर वॉरफेयर संसाधनों को विकसित किया जा रहा है।
कतर के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मामलों के राज्य मंत्री शेख सऊद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने 19 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि देश अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर एक स्थानीय रक्षा उत्पादन केंद्र शुरू करेगा। इससे पहले जनवरी 2026 में कतर की बरज़ान और यूएई की एज (EDGE) कंपनी ने मानवरहित सिस्टम और मिसाइलों जैसी उन्नत तकनीकों के लिए एक संयुक्त उद्यम शुरू किया था।
क्षेत्रीय सहयोग में भी तेजी आई है। अगस्त 2026 में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमले को सभी पर हमला माना जाएगा। वहीं 21 अक्टूबर 2026 को दोहा में पाकिस्तान, तुर्की, कतर और इंडोनेशिया ने 'बद्र समझौता ज्ञापन' पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य सैन्य विनिर्माण और तकनीक के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।
GCC देशों का कुल वार्षिक रक्षा खर्च अब 116 अरब डॉलर से अधिक हो गया है, जो प्रति व्यक्ति दुनिया में सबसे ज्यादा है। सऊदी अरब का लक्ष्य 2030 तक अपने सैन्य खर्च का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा घरेलू उत्पादन पर खर्च करना है।
तनाव के बीच 26 अक्टूबर 2026 को सऊदी अरब ने रियाद की ओर दागी गई एक हूती बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक रोक लिया, जिसकी यूएई ने निंदा की। उसी दिन सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के उच्च स्तरीय राजनयिक प्रतिनिधिमंडल तनाव कम करने के लिए तेहरान पहुंचे। इसमें कतर के मध्यस्थ अमेरिका के साथ समन्वय कर रहे हैं।
दूसरी ओर, मिस्र की संसद ने राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी के उस अनुरोध को मंजूरी दे दी है, जिसमें सऊदी अरब को सीधी सैन्य सहायता प्रदान करने की बात कही गई थी। सुरक्षा मॉडल को मजबूत करने के लिए जुलाई 2026 में 'बहरीन शील्ड' और जनवरी 2026 में सऊदी अरब में 'गल्फ शील्ड' जैसे सैन्य अभ्यास भी किए गए हैं।