Gulf में 768 भारतीय नाविक फंसे, विदेश मंत्री जयशंकर ने कड़े शब्दों में की निंदा

खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नागरिकों के लिए एक बड़ा संकट सामने आया है. एक तरफ जहां 768 भारतीय नाविक समुद्री सुरक्षा खतरों के कारण फंसे हुए हैं, वहीं भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में वाणिज्यिक जहाजरानी पर हो रहे हमलों को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया है. इन गंभीर हमलों में कई भारतीय नाविकों ने अपनी जान गंवाई है, जिससे इस मानवीय संकट की गंभीरता और बढ़ गई है. यह स्थिति उन हजारों भारतीय परिवारों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है, जिनके सदस्य खाड़ी देशों में काम करते हैं या समुद्री यात्रा पर हैं.
27 सितंबर, 2026 तक, कुल 768 भारतीय नाविक फारस की खाड़ी में 28 भारतीय-ध्वज वाले टैंकरों और मालवाहक जहाजों पर फंसे हुए हैं. ये नाविक सुरक्षा संबंधी आवाजाही निलंबन के कारण अपनी यात्रा जारी नहीं रख पा रहे हैं और एक अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं. भारत सरकार की डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कतर, ओमान, बहरीन, कुवैत और ईरान जैसे देशों में लगभग 23,000 अतिरिक्त भारतीय नाविक विभिन्न जहाजों और बंदरगाहों पर तैनात हैं.
इनमें से, सबसे अधिक नाविक संयुक्त अरब अमीरात में 12,830 हैं, इसके बाद सऊदी अरब में 3,131, कतर में 2,372 और ओमान में 1,687 नाविक मौजूद हैं. अच्छी खबर यह है कि मस्कट और बहरीन से 215 व्यक्तियों को सफलतापूर्वक सुरक्षित निकाला जा चुका है. हालांकि, शेष चालक दल अभी भी समुद्री यात्रा की सुरक्षा के संबंध में जहाज ऑपरेटरों के निर्णयों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.
अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की चिंता
रविवार को संयुक्त राष्ट्र में अपने महत्वपूर्ण संबोधन में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खाड़ी, लाल सागर और काला सागर में वाणिज्यिक जहाजरानी पर हो रहे लगातार हमलों की कड़ी निंदा की. उन्होंने इन हमलों को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया. उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इन दुखद घटनाओं में कई भारतीय नाविकों के साथ-साथ अन्य देशों के चालक दल के सदस्यों ने भी अपनी जान गंवाई है. भारत ने लाइबेरिया और 20 से अधिक अन्य देशों के साथ मिलकर नौवहन मार्गों और नाविकों की सुरक्षा की वकालत की है. भारत का स्पष्ट रुख है कि क्षेत्रीय संघर्षों में नाविकों को 'संपार्श्विक क्षति' यानी बेवजह का नुकसान नहीं माना जा सकता है. यह पहल भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को उजागर करती है.
प्रवासी श्रमिकों की दुर्दशा और सरकार के प्रयास
समुद्री सुरक्षा के अलावा, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के छह सदस्य देशों में रहने वाले अनुमानित एक करोड़ भारतीयों के लिए श्रम संबंधी परेशानियां भी एक गंभीर समस्या बनी हुई है. ऐसी ही एक दर्दनाक घटना बलरामपुर, उत्तर प्रदेश के असबाबसाज मुशीर अब्बास के साथ हुई है, जिन्हें मई 2026 में ओमान के सलालाह स्थित अल होस्न फर्नीचर फैक्ट्री के लिए भर्ती किया गया था. 27 सितंबर, 2026 तक की जानकारी के अनुसार, उनके परिवार ने बताया है कि मुशीर अब्बास अपने अनुबंध से बाहर के काम, जैसे भारी सामान उठाना, करने से इनकार करने के बाद बिना पासपोर्ट, वेतन या आवास के फंसे हुए हैं. उनके प्रायोजक उनसे सैकड़ों ओमानी रियाल की बड़ी राशि की मांग कर रहे हैं, जिससे उनकी रिहाई और मुश्किल हो गई है.
कई सोशल मीडिया अपीलों में टैग किए जाने के बावजूद, मस्कट में भारतीय दूतावास ने अभी तक मुशीर अब्बास को उनके प्रायोजक से रिहा कराने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान नहीं की है, जिससे उनके परिवार में चिंता और बढ़ गई है. समुद्री अस्थिरता और श्रम शोषण का यह दोहरा संकट केरल, उत्तर प्रदेश, बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में परिवारों को भेजे जाने वाले प्रेषण (remittances) के प्रवाह को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है. सरकार डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग और विभिन्न दूतावासों के नेतृत्व वाले प्रयासों के माध्यम से स्थिति पर लगातार नजर रख रही है. हालांकि, शिपिंग लेन की सुरक्षा और श्रमिकों को अनुबंध संबंधी बेघर होने से बचाना अभी भी महत्वपूर्ण और अनसुलझी चुनौतियां बनी हुई हैं, जिनके लिए तत्काल समाधान की आवश्यकता है.