खाड़ी देशों में बदला सुरक्षा का माहौल, अमेरिका और ईरान की तनातनी के बीच छह महीने बाद नए समझौते शुरू।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को छह महीने पूरे हो चुके हैं। इस दौरान पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा का एक नया ढांचा तैयार हो रहा है, जिसमें पारंपरिक अमेरिकी भूमिका को हटाने के बजाय नए साझेदार और समझौते शामिल किए जा रहे हैं। सेंटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसी रिसर्च के उपाध्यक्ष रशीद अल-मोहनादी ने 29 अगस्त 2026 को अल जज़ीरा में छपे लेख में बताया कि इस युद्ध ने खाड़ी देशों के सोचने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। अब देश अपनी सुरक्षा और संकट के समय मदद के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इस बदलाव की मुख्य वजह जून 2025 में कतर के अल उदैद एयर बेस पर हुआ ईरानी मिसाइल हमला था, जिसके बाद से क्षेत्रीय रक्षा सहयोग को काफी तेज कर दिया गया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री मार्ग पर तनाव
समुद्री मोर्चे पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव अभी भी बहुत ज्यादा बना हुआ है। 29 अगस्त 2026 को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने इस जलमार्ग पर पूरी तरह से अपना नियंत्रण होने का दावा किया है। उन्होंने अमेरिका के उस दावे को सीधे खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि रास्ता खुला हुआ है। IRGC का नया नियम है कि अब किसी भी जहाज को इस रास्ते से गुजरने के लिए ईरानी अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी। उनका कहना है कि जब तक अमेरिका की तरफ से आक्रामकता बंद नहीं होती, यह नियम लागू रहेगा। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने 27 से 28 अगस्त के बीच बताया कि तेहरान इस रास्ते को दोबारा पूरी तरह खोलने के लिए कुछ खास शर्तें तैयार कर रहा है, जो क्षेत्रीय युद्ध के खत्म होने पर निर्भर करती हैं। इसके साथ ही, ईरान और ओमान के बीच एक शुरुआती समझौता हुआ है ताकि पानी के रास्ते जहाजों के लिए एक अस्थायी गलियारा बनाया जा सके और वहां बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने पर भी बातचीत चल रही है।
कूटनीति और कतर की कोशिशें
तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक बातचीत लगातार जारी है। कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने 27 से 28 अगस्त को तेहरान का दौरा किया। वहां उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन और विदेश मंत्री अब्बास अरागची से मुलाकात की और समुद्र में जहाजों के आने-जाने की आजादी के समर्थन में बात की। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 27 से 28 अगस्त के बीच साफ कर दिया कि वह तेहरान के साथ आमने-सामने की बातचीत नहीं करेंगे। उन्होंने इसके पीछे 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' का हवाला दिया और कहा कि ईरान इस समय बहुत ज्यादा आर्थिक दबाव में है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के नए प्रतिबंधों को 28 अगस्त को 'राज्य प्रायोजित आतंकवाद' बताया, फिर भी दुबई में ईरान से जुड़े व्यापारिक कामकाज अभी भी चल रहे हैं।
सैन्य गतिविधियां और रक्षा समझौते
सैन्य मोर्चे पर भी काफी फेरबदल देखने को मिला है। अमेरिकी CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने 27 अगस्त को जानकारी दी कि IRGC द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों में बिछाई गई समुद्री खदानों को हटा दिया गया है। अमेरिकी युद्धपोत USS जॉर्ज वाशिंगटन को अरब सागर में तैनात किया गया है, जिसने USS अब्राहम लिंकन की जगह ली है। इसके बावजूद, यूरोप में एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने चेतावनी दी है कि उनके पास आधुनिक मिसाइल इंटरसेप्टर की बहुत ज्यादा कमी है, जिसकी पुष्टि नाटो ने भी पैट्रियट हथियारों के स्टॉक को लेकर की है। इसके अलावा, 7 अगस्त 2026 को मक्का में एक बड़ा संयुक्त रक्षा समझौता साइन किया गया। इस समझौते में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान शामिल हैं। इस व्यवस्था के तहत रियाद वित्तीय और भौगोलिक मदद दे रहा है, जबकि पाकिस्तान अपनी सैन्य विशेषज्ञता दे रहा है। ये सारी घटनाएं अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे संयुक्त सैन्य अभियान के बीच हो रही हैं।