Oman में होगी बड़ी बैठक, गल्फ देश और ईरान क्षेत्रीय सुरक्षा पर करेंगे चर्चा.

गल्फ देशों के विदेश मंत्री आगामी सोमवार, 16 सितंबर 2026 को ओमान की राजधानी मस्कट में एक उच्च स्तरीय बैठक के लिए इकट्ठा होने जा रहे हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और विशेष रूप से रणनीतिक हॉर्मूज जलडमरूमध्य की स्थिति पर चर्चा करना है। इस बात की पुष्टि ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने शुक्रवार, 12 सितंबर 2026 को की थी। उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच क्षेत्रीय समझ और आपसी तालमेल बेहतर होगा। दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने शनिवार, 13 सितंबर 2026 को बताया कि यह बैठक ओमान और ईरान के बीच एक नए संयुक्त शिपिंग रूट समझौते को औपचारिक रूप देने के साथ ही आयोजित की जाएगी। इस समझौते को अगस्त के आखिर में चली लंबी तकनीकी बैठकों के बाद अंतिम रूप दिया गया था।
हॉर्मूज जलडमरूमध्य की स्थिति और बढ़ती टेंशन
इस आगामी कूटनीतिक बातचीत के बावजूद, हॉर्मूज जलडमरूमध्य का रास्ता अभी भी पूरी तरह बंद है। ईरान का यह साफ कहना है कि इस जलमार्ग को दोबारा खोलने का फैसला तभी लिया जाएगा जब अमेरिका मध्यस्थों के जरिए भेजी गई उसकी सात खास शर्तों को मान लेगा। तेहरान लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि उसे वहां से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट फीस वसूलने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए, हालांकि ओमान ने इस प्रस्ताव को पहले ही खारिज कर दिया है। क्षेत्रीय तनाव को और हवा देते हुए, यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के अनुसार, रविवार, 13 सितंबर 2026 की सुबह जलडमरूमध्य के पास एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल से एक जहाज के टकराने की खबर सामने आई। इसके अलावा, सऊदी अरब ने शुक्रवार, 12 सितंबर 2026 को अपने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बंद करने का ऐलान किया, क्योंकि इराक में मौजूद ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों ने वहां ड्रोन से हमले किए थे।
बब अल-मंडेन जलडमरूमध्य पर सुरक्षा के हालात
क्षेत्र के दूसरे महत्वपूर्ण मार्ग बब अल-मंडेन जलडमरूमध्य में सुरक्षा के हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हुथी विद्रोहियों ने पेरिम द्वीप, धुबाब शहर और हनिश द्वीपों पर अपना कब्जा जमा लिया है। इसके साथ ही, उन्होंने इस जलमार्ग के यमनी हिस्से पर अपना पूरा नियंत्रण स्थापित कर लिया है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि सभी अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर लगातार आने-जाने के अधिकार की गारंटी देती है, लेकिन इसके बावजूद हुथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जहाजों के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी का ऐलान कर दिया है। विश्लेषक मोहम्मद एलमासरी का कहना है कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष के डर और इस बात की आशंका से कि कहीं बब अल-मंडेन का रास्ता वैश्विक यातायात के लिए खुला रहे लेकिन सऊदी जहाजों के लिए बंद कर दिया जाए, गल्फ देश ईरान के साथ अलग-अलग व्यक्तिगत समझौते करने की कोशिश कर सकते हैं।
बहरीन का फैसला और क्षेत्रीय कूटनीति
इस सामूहिक बैठक से दूरी बनाते हुए बहरीन ने आधिकारिक तौर पर इसमें शामिल होने से मना कर दिया है। बहरीन का तर्क है कि ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत शुरू करने से पहले दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को बहाल करना जरूरी है। हालांकि, इराक के अधिकारियों के इस बैठक में शामिल होने की पूरी संभावना है। यह सारी गतिविधियां अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी की पृष्ठभूमि में हो रही हैं। ईरानी प्रवक्ता बघेई ने चेतावनी दी है कि शिपिंग की सुरक्षा अभी भी खतरे में है, जिसके लिए उन्होंने अमेरिका की आक्रामक नीतियों और आर्थिक युद्ध को जिम्मेदार ठहराया है। गल्फ देशों में रहने वाले और वहां यात्रा करने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी इन क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर नजर रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस तरह के तनावों का असर अक्सर स्थानीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।