Gulf में तनाव तेज, सऊदी अरब के सैन्य बेस पर मिसाइल हमला और हॉर्मुज में जहाज में लगी आग

अरबी प्रायद्वीप में एक बार फिर से तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। Iran समर्थित Houthi विद्रोहियों ने Saudi Arabia के शरूरह सैन्य बेस पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने की जिम्मेदारी ली है। इस हमले के बाद से पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और आम लोगों के बीच चिंता का माहौल बन गया है। सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग ने बताया कि जाज़ान जिले के अल-तुवाल इलाके में भी एक प्रोजेक्टाइल गिरा, जिससे दो लोग घायल हो गए और एक मस्जिद तथा कई रिहायशी घरों को भारी नुकसान पहुंचा है।
हूती विद्रोहियों का दावा और सरकारी प्रतिक्रिया
हूती सेना के प्रवक्ता Yahya Saree ने जानकारी दी कि शरूरह में किया गया यह ऑपरेशन यमन के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाइयों से जुड़े हथियार गोदामों और कमांड सेंटर्स को निशाना बनाने के लिए था। हालांकि, रियाद की तरफ से अभी तक बेस को हुए नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों ने केवल इतना बताया कि हमले की आशंका के चलते इलाके में सायरन बजाए गए थे और स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है। इस तरह के लगातार हमलों से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में मर्चेंट शिप पर हमला
इसी समय के दौरान, फारस की खाड़ी में स्थित कशम द्वीप के पास हॉर्मुज जलडमरूमध्य में एक ईरानी मर्चेंट शिप पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला कर दिया गया। यह घटना सुबह करीब 5 बजे स्थानीय समय के अनुसार हंगाम के पास घटी, जिसकी वजह से एक नाविक की मौत हो गई। हमले के तुरंत बाद चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन जहाज में भीषण आग लग गई। कशम के गवर्नर ने इस हमले के पीछे किसी 'आतंकवादी दुश्मन' का हाथ बताया है, जबकि UK Maritime Trade Operations (UKMTO) ने भी इस समुद्री घटना की पुष्टि की है।
राजनयिक कोशिशें और यमन की स्थिति
आने वाले सोमवार को ओमान में शिपिंग कॉरिडोर को लेकर होने वाली बैठकों से पहले कूटनीतिक प्रयास बहुत तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस बैठक में शामिल होने से बहरीन ने मना कर दिया है, जबकि UAE के वली अहल शेख Khaled bin Mohamed Al Nahyan ने हाल ही में भारत में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से मुलाकात की थी। यमन की सरकार ने बताया कि उसने पिछले 48 घंटों में 100 से ज्यादा हवाई हमले किए हैं। इन हमलों की वजह से हजारों आम नागरिकों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा है और साल 2022 में हुआ संघर्षविराम समझौता लगभग टूट चुका है। बाजार के जानकारों और एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे पर लगातार हो रहे इन ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण आने वाले दिनों में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है।