कतर में वर्क वीजा घटे, विजिट वीजा पर जोर; X पर प्रवासियों ने जताई चिंता
खाड़ी देशों में वर्क वीजा की कमी और सख्त नियमों को लेकर दक्षिण एशियाई प्रवासियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी चिंता जताई है।

दौहा/दुबई: खाड़ी देशों में वर्क वीजा की उपलब्धता कम होने और नौकरी के बाजार में सख्ती को लेकर प्रवासियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी गंभीर चिंताएं जाहिर की हैं। मुख्य रूप से दक्षिण एशिया से आने वाले विदेशी कामगारों ने वहां बदलती नीतियों और रोजगार के सीमित अवसरों को लेकर अपनी परेशानी साझा की है।
नवंबर 2026 की शुरुआत में शुरू हुई इस चर्चा में कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान जैसे देशों की नीतियों में आए बदलावों पर जोर दिया गया है। प्रवासियों का दावा है कि कतर में अधिकारियों ने वर्क वीजा जारी करने में कटौती की है और अब विजिट वीजा पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर साझा की गई रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ खास देशों के नागरिकों के लिए वर्क वीजा मिलना अब और मुश्किल हो गया है। जानकारों का मानना है कि यह स्थिति क्षेत्रीय स्तर पर चल रहे 'नेशनलाइजेशन' के रुझान का नतीजा है, जैसा कि सऊदी अरब में 'सऊदीकरण' (Saudization) पहल के जरिए देखा गया है।
इन नीतिगत बदलावों की वजह से भविष्य में प्रवास करने की योजना बना रहे लोगों के बीच अनिश्चितता का माहौल है। हालांकि इससे स्थानीय नागरिकों के लिए नौकरियों के अवसर बढ़े हैं, लेकिन विदेश से आने वाले इच्छुक कामगारों के लिए यह एक बड़ी बाधा बन गया है।
विश्लेषकों ने कहा है कि सोशल मीडिया पर हो रही इन चर्चाओं के बाद अब गल्फ सरकारों की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण की जरूरत है। उन्होंने मांग की है कि वीजा जारी करने के वास्तविक आंकड़ों और राष्ट्रीयता आधारित प्रतिबंधों पर स्पष्ट जानकारी दी जाए।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि नौकरी की तलाश कर रहे लोग केवल सत्यापित जॉब ऑफर और अपने संबंधित दूतावासों से मिले मार्गदर्शन पर ही भरोसा करें। इस पूरी स्थिति पर नौकरी चाहने वाले प्रवासियों, रिक्रूटर्स, गल्फ के नियोक्ताओं और प्रवासी समुदायों की नजर बनी हुई है।