वेस्ट बैंक में इसराइली सेना द्वारा जमीन कब्जाने पर हमास ने जताई कड़ी आपत्ति, जानिए पूरा मामला.

वेस्ट बैंक के कबातिया शहर में इसराइली सेना द्वारा जमीन पर कब्जा करने की कार्रवाई के बाद हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। इस मामले पर 5 सितंबर 2026 को हमास के एक नेता ने औपचारिक रूप से कड़ी निंदा की है और इस कदम को फिलिस्तीनी अधिकारों पर बड़ा हमला बताया है। इस पूरी कार्रवाई से स्थानीय लोगों में काफी गुस्सा और चिंता का माहौल देखने को मिल रहा है.
सैन्य आदेश के तहत जमीन जब्त
मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई सैन्य आदेश संख्या एम.डी. 28/26 के तहत की गई है। इस आदेश के माध्यम से उत्तरी अधिकृत वेस्ट बैंक में जेनिन के दक्षिण में स्थित 7.498 ड्यूनम यानी लगभग 1.85 एकड़ फिलिस्तीनी जमीन को अपने कब्जे में ले लिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया के पीछे इसराइली अधिकारियों की तरफ से सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया है, ताकि हाल ही में स्थापित 'नोआ' चौकी के उत्तर में एक सैन्य सड़क और एक वॉचटावर का निर्माण किया जा सके.
अपील के लिए बेहद कम समय
यह सैन्य आदेश कुल 60 दिनों के लिए वैध बताया गया है, जिससे बेसिन 28 और 34 की जमीन सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। फिलिस्तीनी कोनाइजेशन एंड वॉल रेजिस्टेंस कमीशन (CWRC) की रिपोर्ट के मुताबिक, इसराइली कोऑर्डिनेशन एंड लियान प्रशासन द्वारा किए गए फील्ड निरीक्षण के बाद जमीन मालिकों को अपील दायर करने के लिए केवल 24 घंटे की बेहद सीमित अवधि दी गई थी, जिससे किसी भी तरह की कानूनी राहत पाना लगभग असंभव सा हो गया है.
अम्नेस्टी इंटरनेशनल की तीखी प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर मानवाधिकार संगठनों की तरफ से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। 4 सितंबर 2026 को अम्नेस्टी इंटरनेशनल ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि यह जमीन जब्ती अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। संगठन के मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र के निदेशक हेबा मोरायेफ ने बताया कि एरिया ए में की गई यह जब्ती बढ़ते हुए कब्जे के एजेंडे को दर्शाती है, जो उस क्षेत्र में अतिक्रमण करता है जिसे फिलिस्तीनी प्राधिकरण के नियंत्रण में रहना चाहिए था.
फिलिस्तीनी अधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि सुरक्षा का हवाला देकर उठाए जा रहे ये कदम असल में औपनिवेशिक विस्तार को बढ़ावा देने और फिलिस्तीनी लोगों की कृषि तक पहुंच और उनकी आय को कमजोर करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं। स्थानीय किसान लगातार अपनी जमीनों पर हो रहे इन बदलावों से परेशान हैं और उनकी आजीविका पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।