Al-Aqsa Mosque: इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मस्जिद परिसर में घुसने पर मचा भारी बवाल.

Sushma Kumari20 September 20262 min read1 viewWorld
Al-Aqsa Mosque: इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मस्जिद परिसर में घुसने पर मचा भारी बवाल.

इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के अल-अक्सा मस्जिद परिसर में जाने के बाद हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। इस घटना के बाद हमास ने कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे सीधे तौर पर मस्जिद की पहचान पर हमला बताया है। इस मामले को लेकर फिलिस्तीन और अरब देशों में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है और आम लोगों से भी वहां अपनी मौजूदगी बढ़ाने की अपील की गई है।

अल-अक्सा मस्जिद परिसर में क्या हुआ

रविवार, 20 सितंबर 2026 को इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu कड़े सुरक्षा पहरे के बीच कई मंत्रियों और हजारों इसराइलियों के साथ पूर्वी यरूशलम के वेस्टर्न वॉल प्लाजा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अल-अक्सा मस्जिद और वेस्टर्न वॉल के आसपास की सुरंगों और हो रही खुदाई का जायजा लिया। इस पूरी यात्रा के दौरान उनके बयानों को लेकर हमास ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे पवित्र स्थल की स्थिति के साथ खिलवाड़ बताया।

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इसी दिन सुबह के वक्त करीब 100 इसराइली नागरिक इसराइली पुलिस की सुरक्षा में अल-अक्सा मस्जिद परिसर के अंदर दाखिल हुए। ये लोग आने वाले योम किप्पुर त्योहार के मौके पर वहां ताल्मुडिक अनुष्ठान करने पहुंचे थे। आपको बता दें कि यह यहूदी त्योहार 20 सितंबर की शाम को शुरू होकर 21 सितंबर को समाप्त होना था। इसराइली पुलिस की तरफ से साल 2003 से ही इसराइलियों को इस परिसर में आने की एकतरफा अनुमति दी जाती रही है।

फिलिस्तीन और जॉर्डन का कड़ा रुख

फिलिस्तीन के यरूशलम गवर्नरेट ने साफ शब्दों में कहा है कि 144-डनम् में फैला अल-अक्सा मस्जिद परिसर, जिसमें इसके प्रांगण, प्रार्थना हॉल, दीवारें और गेट ऑफ मर्सी शामिल हैं, पूरी तरह से मुसलमानों का पवित्र स्थल है। गवर्नरेट ने उन समूहों को कड़ी चेतावनी दी है जो इस जगह की पुरानी स्थिति को बदलना चाहते हैं। उनका कहना है कि इसराइली प्रशासन का इस पवित्र स्थल पर कोई अधिकार नहीं है और यहां किसी भी तरह के बदलाव की कोशिश ऐतिहासिक नियमों को चुनौती देना है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद हमास ने फिलिस्तीनी लोगों से अपील की है कि वे मस्जिद में अपनी संख्या बढ़ाएं और अरब तथा इस्लामिक देशों से कहा है कि वे इस स्थिति का डटकर मुकाबला करें। दूसरी तरफ, जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने भी अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि जॉर्डन द्वारा संचालित यरूशलम वक्फ ही इस परिसर के प्रशासन की एकमात्र autoridad है। इससे पहले सितंबर के महीने के मध्य में भी हमास ने यहूदी छुट्टियों के सीजन के दौरान मस्जिद को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई थी और इसके इतिहास को बचाने के लिए तुरंत कदम उठाने की बात कही थी।

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