हिजबुल्लाह प्रमुख ने अमेरिकी शांति प्रस्ताव को खारिज किया और इजरायली हमले रोकने के लिए ईरान का समर्थन जताया
हिजबुल्लाह चीफ नईम कासिम ने अमेरिकी फ्रेमवर्क को अवैध बताते हुए खारिज किया और कहा कि इजरायली कब्जे तक हथियार नहीं छोड़ेंगे।

बेरुत: हिजबुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम ने अमेरिका द्वारा तैयार किए गए उस फ्रेमवर्क समझौते को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जो जून 2026 में बेरुत और इजरायल के बीच बनाया गया था। कासिम ने इस समझौते को अवैध बताया और कहा कि यह लेबनान के संविधान का उल्लंघन करता है और इसमें इजरायल को गलत तरीके से रियायतें दी गई हैं।
29 अक्टूबर 2026 को दिए अपने संबोधन में कासिम ने कहा कि ईरान ने लेबनान के खिलाफ इजरायली हमलों को रोकने और वहां से इजरायली सेना की वापसी सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी है। उन्होंने बताया कि ईरान की मजबूती और कूटनीतिक कोशिशों की वजह से हाल के सैन्य हमलों की तीव्रता को कम करने में मदद मिली है।
हथियारों के मुद्दे पर हिजबुल्लाह प्रमुख ने साफ किया कि जब तक लेबनान में इजरायली कब्जा और सैन्य हमले जारी रहेंगे, तब तक उनका संगठन निशस्त्रीकरण पर कोई चर्चा नहीं करेगा।
इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को हुए चुनावों के बाद वहां की राजनीतिक स्थिति पर बात करते हुए कासिम ने कहा कि हिजबुल्लाह को चुनाव के नतीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने संकल्प जताया कि इजरायल में चाहे कोई भी गुट सरकार चलाए, उनका प्रतिरोध जारी रहेगा।
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 28 अक्टूबर 2026 को कहा कि तेहरान इस विवाद को सुलझाने के लिए राजनयिक रास्ते अपना रहा है, हालांकि ईरान ने कतर के ताजा शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। अराघची ने चेतावनी दी कि अगर इजरायल ने फारस की खाड़ी में कोई सैन्य कार्रवाई की, तो इसका वैश्विक बाजारों पर बड़ा असर होगा।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के दौरान मध्य पूर्व की अस्थिरता को दूर करने के लिए क्षेत्रीय समाधानों पर जोर दिया और इसमें अमेरिका की भागीदारी को बाहर रखने की बात कही। वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान शत्रुता को समाप्त करने के लिए तेहरान अपनी बुनियादी शर्तों पर कोई समझौता नहीं करेगा।