Himalayas Glacier Collapse: हिमालय में भयानक ग्लेशियर टूटने से 797 लोगों की मौत, 3000 से ज्यादा लोग लापता

हिमालयी क्षेत्र में बुधवार, 26 अगस्त 2026 को हुए एक भीषण ग्लेशियर टूटने की घटना ने नेपाल और चीन की सीमा पर भारी तबाही मचा दी है। इस भयंकर आपदा के कारण बड़े पैमाने पर बाढ़ आ गई है, जिससे अब तक कम से कम 797 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 3000 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने रविवार, 30 अगस्त 2026 तक की रिपोर्ट में 788 लोगों की मौत और 2,502 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। इसके अलावा चीनी अधिकारियों ने ग्यारियोंग काउंटी में 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की बात कही है।
आपदा से हजारों लोग प्रभावित और विदेशी नागरिकों की स्थिति
इस आपदा की वजह से लगभग 90,000 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इनमें जलविद्युत परियोजनाओं पर काम करने वाले सैकड़ों मजदूर भी शामिल हैं, जिनके सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। चीनी अधिकारियों के अनुसार, ग्यारियोंग पोर्ट पर 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक लापता हैं, जिनमें 104 नेपाली, 49 भारतीय, 33 लातवियाई और 18 अमेरिकी नागरिक शामिल हैं। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने चीन के इन आंकड़ों पर असहमति जताई है और कहा है कि कम से कम 85 अमेरिकी नागरिक लापता हैं। तिब्बत में लापता होने वाले लोगों में अन्य देशों के नागरिक भी शामिल हैं।
सरकारी अधिकारियों के बयान और जलवायु परिवर्तन का असर
बीते 29 अगस्त को चीन के विदेश मंत्री वांग यी और नेपाल के उनके समकक्ष शिशिर खनाल ने इस घटना को हाल के वर्षों की सबसे गंभीर सीमा-पार आपदा करार दिया। दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टिफेल ने भी इस त्रासदी के लिए हिमालयी क्षेत्र पर ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते बुरे प्रभावों को जिम्मेदार ठहराया है। अधिकारियों का मानना है कि जलवायु में लगातार हो रहे बदलाव इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे आम जनजीवन पर भारी संकट मंडरा रहा है.
राहत और बचाव कार्यों में आ रही बाधाएं
खराब मौसम और लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण खोज और बचाव अभियानों में भारी बाधा आ रही है। शुक्रवार से ही खराब मौसम और बाढ़ के दोबारा आने के खतरे के कारण राहत कार्यों को बार-बार रोकना पड़ा है। शनिवार देर रात एक और नया भूस्खलन हुआ, जो पहले खाली की गई झील से करीब 2.8 किलोमीटर नीचे की ओर था। इस नए भूस्खलन से एक नया बांध और तालाब जैसा बन गया है, जिससे भविष्य में और अधिक बाढ़ आने की आशंका काफी बढ़ गई है।
चीनी अधिकारियों द्वारा ऊपर की तरफ से पानी का बहाव बढ़ने की चेतावनी मिलने के बाद, नेपाल के अधिकारियों ने भुटेकोशी नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए वहां के स्थानीय नागरिकों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा काठमांडू को आपदा क्षेत्र से जोड़ने वाला एक मुख्य राजमार्ग भी पूरी तरह से ढह गया है, जिससे आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय मदद और सामूहिक अंतिम संस्कार
नेपाल में अधिकारियों ने डीएनए के नमूने एकत्र करने के बाद सैकड़ों अज्ञात शवों का सामूहिक अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया है। इस संकट की घड़ी में अंतरराष्ट्रीय मदद भी तेजी से जुटाई जा रही है। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने घोषणा की है कि उनका देश राहत और बचाव कार्यों में सहायता के लिए अपनी एक विशेष टीम भेजेगा। इसके अलावा भारत और दक्षिण कोरिया की टीमों ने भी इस चल रहे खोज अभियान में अपनी मदद का भरोसा दिया है। प्रभावित इलाकों में स्थिति अभी भी काफी तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।