होर्मुज़ जलडमरूमध्य में रुकावट से दुनिया भर में उर्वरक की कमी, बढ़ी चिंता

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन यानी FAO ने दुनिया भर के देशों के लिए एक बड़ी चेतावनी जारी की है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे गंभीर युद्ध के कारण समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस रुकावट की वजह से वैश्विक स्तर पर खाद यानी उर्वरक की भारी किल्लत पैदा हो गई है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र समेत पूरा बाजार चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है।
ओलेग कोबियाकोव ने दी जानकारी
एफएओ के रूसी संघ स्थित संपर्क कार्यालय के निदेशक ओलेग कोबियाकोव ने रिया नोवोस्ती से बातचीत के दौरान इस बात की पूरी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही रुकने की वजह से खाद की सप्लाई पर सीधा असर पड़ा है। इस संकट के कारण न केवल कृषि बाजार की स्थिति खराब हो रही है, बल्कि ऊर्जा की कीमतें भी लगातार बढ़ती जा रही हैं।
कोबियाकोव ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान से जुड़ा यह संकट अब थोड़े समय के तनाव तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह एक लंबी और बड़ी समस्या का रूप ले चुका है। इस स्थिति ने दुनिया भर के देशों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, क्योंकि इसका असर आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतों और खेती पर पड़ने लगा है.
युद्ध और संघर्ष का इतिहास
इस पूरे विवाद की शुरुआत इसी साल 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले शुरू किए थे। इसके जवाब में ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की गई और हमले किए गए। इसके बाद जून के मध्य में तेहरान और वाशिंगटन ने लड़ाई रोकने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, ताकि हालात सुधर सकें।
हालांकि यह शांति समझौता ज्यादा लंबे समय तक टिक नहीं पाया और दोनों पक्षों ने एक बार फिर से एक-दूसरे पर हमले शुरू कर दिए। फिलहाल की स्थिति यह है कि यह संघर्ष अभी तक पूरी तरह से सुलझ नहीं पाया है और दोनों तरफ से तनाव लगातार बना हुआ है।
वैश्विक सप्लाई रूट पर असर
इस बढ़ते संघर्ष के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। यह समुद्री मार्ग तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस यानी LNG के वैश्विक बाजार के लिए दुनिया का सबसे अहम सप्लाई रूट माना जाता है।
इस महत्वपूर्ण मार्ग के बंद होने या बाधित होने के परिणामस्वरूप दुनिया भर के ज्यादातर देशों में ईंधन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, जिससे महंगाई का संकट और अधिक गहराता जा रहा है।