होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़ों पर हमले बढ़े, सिंगापुर का जहाज़ डूबा

होर्मुज़ जलडमरूमध्य: सिंगापुर के झंडे वाला कंटेनर जहाज़ GFS Pride 14 अक्टूबर 2026 को किसी अज्ञात प्रक्षेप्य से टकराने के बाद डूब गया। जहाज़ पर 2,500 से ज़्यादा कंटेनर लदे थे। जहाज़ के सभी 21 नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया और किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
सिंगापुर के समुद्री और बंदरगाह प्राधिकरण ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे बिना उकसावे का हमला बताया और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। इससे पहले 23 सितंबर को एंटीगुआ और बारबुडा के झंडे वाला जहाज़ Cape Dao भी डूब चुका है।
रिपोर्ट के मुताबिक 12 अक्टूबर से अब तक कम से कम 10 जहाज़ निशाना बने हैं। फ़रवरी में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद यह अब तक की सबसे ज़्यादा घटनाएं हैं। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) ने 48 घंटों में कम से कम पांच अलग-अलग घटनाएं दर्ज कीं, जिनमें ड्रोन हमले भी शामिल हैं।
11 अक्टूबर को MT PETRO DOLPHIN पर ड्रोन से हमला हुआ, जिसमें दो भारतीय नाविक लापता हो गए। इसी दिन मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला MT VALTHERA एक प्रक्षेप्य से टकराने के बाद आग की चपेट में आ गया। भारत के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की निंदा की और भारतीय नागरिकों पर पड़ते असर का हवाला देते हुए तुरंत तनाव कम करने की मांग की।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) का दावा है कि GFS Pride अनधिकृत मार्ग पर था और नौसैनिक माइन से टकराया। समुद्री सुरक्षा फर्म मैरिस्क्स ने कहा कि इस दावे के समर्थन में उसे कोई स्वतंत्र सबूत नहीं मिला है। IRGC का यह भी कहना है कि 22 अगस्त से अब तक उसने 30 जहाज़ों को अनधिकृत रूप से गुजरने से रोका है, और उसके मुताबिक इस रास्ते से गुजरने के लिए पहले से समन्वय और शुल्क ज़रूरी है।
दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि जलमार्ग पर अमेरिकी बल और क्षेत्रीय साझेदार नियंत्रण में हैं। वह ईरानी जहाज़ों के खिलाफ नाकेबंदी लागू रखे हुए है और अक्सर जहाज़ों को ओमान के तट के करीब के रास्तों से निकाल रहा है।
अमेरिका की अगुवाई वाले जॉइंट मैरिटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर (JMIC) और मैरिटाइम जॉइंट इन्फॉर्मेशन सेंटर (MJIC) ने वाणिज्यिक जहाज़ों के लिए खतरे का स्तर "गंभीर" कर दिया है। उनके आकलन में जानबूझकर हमले का जोखिम "बहुत अधिक" है। IRGC के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल यदुल्लाह जवानी ने कहा है कि इस टकराव से वैश्विक शक्ति संतुलन बदल सकता है।
अक्टूबर 2026 में इस जलडमरूमध्य के हालात अब तक के सबसे हिंसक दौर में गिने जा रहे हैं, और इलाके में रोज़ाना हमले हो रहे हैं।