बिहार सीमा पर नेपाल में एम्बुलेंस वैन से 60 किलो गांजा बरामद, स्वास्थ्य सेवा की आड़ में बड़ा खेल आया सामने.

बिहार के अररिया जिले से सटे नेपाल सीमा के पास एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया है। नेपाल के विराटनगर में एक अस्पताल के नाम पर रजिस्टर्ड वैन से लगभग 60 किलो गांजा बरामद किया गया है। स्वास्थ्य सेवा और मरीज लाने-ले जाने की आड़ में इस तरह अवैध नशे का कारोबार किए जाने से सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ गई है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और हर कोई यह सोच रहा है कि आखिर कैसे एम्बुलेंस या अस्पताल की गाड़ियों का इस्तेमाल गैरकानूनी कामों के लिए धड़ल्ले से किया जा रहा था।
कैसे पकड़ा गया अस्पताल की आड़ में चल रहा तस्करी का खेल
यह पूरी घटना 02 सितंबर की है जब नेपाल के विराटनगर महानगरपालिका के अंतर्गत आने वाले दरैया स्थित कोलर चौक पर जांच चल रही थी। वहां मौजूद सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल की बीओपी दरैया की एपीएफ टीम ने एक संदिग्ध सुजुकी वैन को रुकने का इशारा किया। इस गाड़ी का नंबर कोच 6620 था और इसके ऊपर दिव्य ज्योति अस्पताल प्रा.लि. लिखा हुआ था। सुरक्षा बल के जवानों को देखकर गाड़ी का चालक काफी घबरा गया और जांच शुरू होते ही गाड़ी को बीच सड़क पर छोड़कर वहां से मौके से फरार हो गया। पुलिस और सुरक्षा बलों ने जब उस लावारिस वैन की बारीकी से तलाशी ली तो उनके होश उड़ गए।
वैन के अंदर दो बड़े बोरों में ठूंस-ठूंस कर गांजा भरा हुआ था। तौलने और अनुमान लगाने पर यह नशीला पदार्थ करीब 60 किलो पाया गया। आमतौर पर इस तरह की गाड़ियों का इस्तेमाल भारत और नेपाल के बीच मरीजों को अस्पताल पहुंचाने या वापस लाने के लिए किया जाता है ताकि किसी को शक न हो। लेकिन इस बार तस्करों ने मरीजों की ढोने वाली गाड़ी को ही नशे के सामान की ढुलाई का जरिया बना लिया था। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अब नेपाल और भारत दोनों तरफ की पुलिस हरकत में आ गई है और मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है।
अस्पताल प्रबंधन और मालिक पर लटकी जांच की तलवार
गाड़ी पर अस्पताल का नाम साफ-साफ लिखे होने के कारण अब इस मामले की जांच का दायरा केवल फरार चालक तक ही सीमित नहीं रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस वैन का असली मालिक कौन है और इसका उस अस्पताल से किस तरह का सीधा संबंध है। क्या अस्पताल प्रबंधन के किसी बड़े आदमी की इस अवैध धंधे में मिलीभगत है या फिर किसी ने गाड़ी का फर्जी इस्तेमाल किया है, इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। इसके साथ ही पुलिस यह भी खंगाल रही है कि इस गांजा तस्करी के नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं जो पर्दे के पीछे से इस पूरे खेल को चला रहे थे।
सीमावर्ती इलाकों में मरीजों को लाने-ले जाने के नाम पर ऐसी संदिग्ध गाड़ियों के पकड़े जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। स्थानीय लोगों और रिपोर्ट्स के अनुसार पहले भी इस तरह के रास्तों पर चश्मा, लेंस और महंगी दवाओं की तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं। एम्बुलेंस या मेडिकल सेवा से जुड़ी गाड़ियों पर आम तौर पर पुलिस या सुरक्षा बल ज्यादा सख्ती से जांच नहीं करते हैं और इसी बात का फायदा ये शातिर तस्कर उठाते हैं। इस ताजा घटना से यह बात बिल्कुल साफ हो गई है कि स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन वाहनों की आड़ में चल रहे इन संदिग्ध और अवैध कारोबारों पर अब सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक कड़ी निगरानी रखने की जरूरत है ताकि इस तरह के गोरखधंधे पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। इस मामले की अधिक जानकारी के लिए आप हिन्दुस्थान समाचार की मूल रिपोर्ट देख सकते हैं।