इस्तांबुल में हुई बैठक में सऊदी अरब तुर्की मिस्र और पाकिस्तान ने हूती मिलिशिया की सैन्य गतिविधियों की कड़ी निंदा की

इस्तांबुल में हुई बैठक में सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान ने हूती मिलिशिया की सैन्य गतिविधियों और लाल सागर में हमलों की कड़ी निंदा की।

Gautam Sahu24 October 20262 min read0 viewsWorld
इस्तांबुल में हुई बैठक में सऊदी अरब तुर्की मिस्र और पाकिस्तान ने हूती मिलिशिया की सैन्य गतिविधियों की कड़ी निंदा की

इस्तांबुल: सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने एक बैठक में यमन के हूती मिलिशिया की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर गहरा रोष जताया है। इस बैठक में चारों देशों ने सऊदी अरब, आम नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे और लाल सागर व बाब अल-मंडब में वाणिज्यिक जहाजों पर हूती हमलों की निंदा की।

इन देशों ने मांग की है कि इन हमलों को तुरंत रोका जाए और हूती समूह को राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कहा गया है। मंत्रियों ने सऊदी अरब और यमन सरकार के प्रति अपनी एकजुटता जाहिर की और कहा कि इस हिंसा ने यमन में मानवीय संकट को और ज्यादा बढ़ा दिया है।

बाद में एक विस्तृत सत्र में फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन के विदेश मंत्रियों ने भी इस चर्चा में हिस्सा लिया। इस दौरान अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष, फिलिस्तीनी क्षेत्रों के हालात और होर्मुज जलडमरूमध्य, बाब अल-मंडब और काला सागर में समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर बातचीत हुई।

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प्रतिनिधियों ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के मुताबिक स्थायी समाधान निकालने के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाना जरूरी है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव को लेकर मंत्रियों ने विवाद सुलझाने के लिए राजनयिक जुड़ाव की वकालत की और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना न बनाने की चेतावनी दी।

बैठक में नेविगेशन की आजादी को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया। मंत्रियों ने कहा कि वैश्विक शिपिंग मार्गों में रुकावट से राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि को खतरा होता है, जिससे ऊर्जा, भोजन और उर्वरकों के परिवहन पर असर पड़ता है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में बिना किसी रोक-टोक के आवाजाही बहाल करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामूहिक कार्रवाई की अपील की।

फिलिस्तीन मुद्दे पर मंत्रियों ने इजरायली कब्जे को क्षेत्रीय अस्थिरता का मुख्य कारण बताया। उन्होंने फिलिस्तीनियों के आत्मनिर्णय के अधिकार और 4 जून 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी जेरूसलम की राजधानी वाले एक स्वतंत्र और संप्रभु राज्य की स्थापना का समर्थन किया। समूह ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप टू-स्टेट सॉल्यूशन को लागू करने की जरूरत पर जोर दिया।

इस दौरान मंत्रियों ने इस्लामाबाद में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन (MoU) के प्रति अपना समर्थन भी व्यक्त किया।

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