हुतियों ने सऊदी पर मिसाइल दागे, ट्रंप ने रोका हमला, रेड सी में बढ़ा तनाव

Aanya22 September 20264 min read0 viewsYemen
हुतियों ने सऊदी पर मिसाइल दागे, ट्रंप ने रोका हमला, रेड सी में बढ़ा तनाव

हाल ही में क्षेत्रीय तनाव में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई, जब 19 सितंबर, शनिवार को यमन स्थित हुती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइल दागे। इस हमले के बाद सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग को रियाद में हवाई हमले के अलर्ट जारी करने पड़े, जिससे पूरे शहर में हड़कंप मच गया। रिपोर्टों के अनुसार, निवासियों ने जोरदार धमाकों की आवाजें सुनीं और किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक ईंधन डिपो में भीषण आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए अग्निशमन कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। यह घटना तब सामने आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस के अनुरोध पर हुतियों के खिलाफ सैन्य हमले की तैयारी कर ली थी, लेकिन रविवार को आखिरी मिनट में इस ऑपरेशन को रद्द कर दिया।

हमले के बाद रियाद के आसमान में काला धुआं दूर से ही देखा जा सकता था, जिसकी तस्वीरें रॉयटर्स के एक स्ट्रिंगर ने भी कैद कीं। सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए बताया कि उन्होंने हुतियों की मिसाइल को सफलतापूर्वक हवा में ही रोक दिया। गठबंधन ने यह भी दावा किया कि उन्होंने बिषा, ताइफ, फरासान और यानबू जैसे अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने के हुतियों के कई प्रयासों को भी विफल कर दिया। दूसरी ओर, हुतियों ने दावा किया कि उन्होंने रियाद में संवेदनशील स्थलों और यानबू में अरामको की तेल सुविधाओं पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन का एक बड़ा जत्था लॉन्च किया था। हालांकि, रियाद में हुए इस हमले में किसी के हताहत होने की कोई पुष्टि नहीं हुई, यह सऊदी सुरक्षा बलों की त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया के कारण संभव हो पाया।

यमन में बिगड़ते हालात और मानवीय संकट

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यमन में मानवीय स्थिति पहले से ही काफी गंभीर बनी हुई है। 22 सितंबर, मंगलवार तक, हुती-नियंत्रित मीडिया ने रिपोर्ट दी कि मोखा के बंदरगाह शहर पर सऊदी हवाई हमलों में कम से कम छह नागरिक मारे गए, जिनमें दो बच्चे और एक महिला शामिल थे, जबकि आठ अन्य घायल हो गए। यह घटना यमन में जारी संघर्ष की भयावहता को उजागर करती है, जहां आम लोग लगातार हिंसा का शिकार हो रहे हैं। संघर्ष वर्तमान में ताइज़ और लाहज में कहाबूब पहाड़ों पर केंद्रित है, क्योंकि इन ऊंचाइयों पर नियंत्रण बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करता है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक शिपिंग के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, और इस पर किसी भी नियंत्रण से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर सीधा असर पड़ेगा। संयुक्त राष्ट्र ने पश्चिमी यमन तट पर बड़े पैमाने पर विस्थापन दर्ज किया है, जिससे लाखों लोग अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर हुए हैं। सरकारी बलों ने दावा किया है कि उन्होंने ताइज़ के पश्चिम और दक्षिण में कुछ क्षेत्रों पर फिर से कब्जा कर लिया है, जबकि हुती दावा कर रहे हैं कि उन्होंने इस महीने की शुरुआत में मोखा और पेरिम (मयुन) द्वीप पर कब्जा कर लिया है, जिससे क्षेत्र में लगातार बदलती सैन्य स्थिति दिख रही है।

इन घटनाओं के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के अनुरोध पर हुतियों के खिलाफ सैन्य हमले की तैयारी की थी। लेकिन रविवार को अचानक, उन्होंने आखिरी मिनट में इस ऑपरेशन को रद्द करने का फैसला किया, जिससे कई सवाल खड़े हो गए। इस रद्द किए गए हमले के बाद, हुती के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उनका समूह अमेरिकी जहाजों पर हमला करने से बचेगा, लेकिन सऊदी अरब के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगा जब तक कि हुती-नियंत्रित बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी समाप्त नहीं हो जाती। इस बयान से हुतियों की रणनीतिक सोच सामने आती है, जिसमें वे अमेरिका के साथ सीधे टकराव से बचते हुए अपने मुख्य लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यमन के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नेता रशाद अल-अलीमी ने इन घटनाओं के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका से समर्थन का अनुरोध किया है। वहीं, जी7 समूह के विदेश मंत्रियों ने भी हुती हमलों को तुरंत रोकने की मांग की है, जो इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय चिंता को उजागर करता है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे तनाव को लेकर चेतावनी जारी की है और अपने नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है।

क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और ऊर्जा मार्गों पर खतरा

ये सभी घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग के लिए बड़ा खतरा पैदा करते हैं। सऊदी अरब ने पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता के कारण अपने तेल निर्यात मार्गों को रेड सी के माध्यम से मोड़ दिया था। अब रेड सी में बढ़ते तनाव से यह वैकल्पिक मार्ग भी जोखिम में आ गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ेगा। कतर, यूएई और अन्य खाड़ी देशों के अधिकारियों ने क्षेत्रीय ‘चोकपॉइंट्स’ यानी महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर दोहरे खतरे को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। यूएई के अधिकारी अनवर गर्गश ने यह भी कहा कि सुरक्षा वार्ताओं में ईरानी और अरब दोनों दृष्टिकोणों को शामिल किया जाना चाहिए, जिससे समस्या का एक स्थायी समाधान खोजा जा सके। राष्ट्रपति ट्रंप न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग ले रहे थे, ऐसे समय में कूटनीतिक मोर्चे पर भी तनाव बना हुआ है। इन लगातार हमलों और बढ़ते तनाव के कारण शिपिंग कंपनियों को रेड सी में अपने संचालन के लिए बढ़ते जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह स्थिति न केवल क्षेत्र की सुरक्षा के लिए, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।

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