हूतियों ने अदन और मक्का को बनाया निशाना, यमन सरकार ने बताया खतरनाक साजिश
हूतियों ने अदन के हवाई अड्डे और मक्का की ओर मिसाइल व ड्रोन हमले किए। यमन सरकार ने इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है।

अदन: यमन की कैबिनेट ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को हूती आतंकवादियों द्वारा अदन और मक्का पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है। सरकार ने इन हमलों को क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक खतरनाक कदम बताया है, जिससे इस्लामी पवित्र स्थलों की पवित्रता को भी खतरा पैदा हुआ है।
एक ही दिन में हुए इन हमलों में हूतियों ने अदन स्थित अंतरिम राजधानी के सरकारी मुख्यालय अल-माशिक पैलेस को दूसरी बार और अदन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को सातवीं बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। इसी दौरान सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने मक्का क्षेत्र की ओर भेजे गए एक हूती ड्रोन को सफलतापूर्वक नष्ट करने की जानकारी दी।
दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारे ने इस ऑपरेशन से इनकार किया है। उन्होंने सऊदी अरब के दावे को एक बड़ा झूठ और सरासर दुष्प्रचार करार दिया है।
यमन सरकार ने अपने बयान में कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे पर ये हमले सीधे तौर पर नागरिकों के हितों पर हमला हैं और सरकार के कामकाज को ठप करने की कोशिश है। कैबिनेट के मुताबिक, इस तरह की आक्रामकता के जवाब में सुरक्षा उपायों को बढ़ाने और विशेष एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जैसे संस्थागत कदम उठाने की जरूरत है।
सरकार ने इन सुरक्षा खतरों से निपटने में सऊदी अरब के साथ अपनी पूरी एकजुटता जाहिर की है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई है कि वह इन उल्लंघनकारी गतिविधियों को रोकने के लिए सख्त और व्यावहारिक रुख अपनाए, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय नौवहन और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
इससे पहले यमन सरकार ने 24 और 26 अक्टूबर 2026 को तट रक्षक सुविधाओं और विस्थापितों के शिविर पर हुए मिसाइल हमलों के मामले में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की थी। सरकार की मांग है कि संयुक्त राष्ट्र हूती मिलिशिया के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करे और हथियारों के प्रतिबंध को सख्ती से लागू करे।
30 अक्टूबर को ही यमन सशस्त्र बलों ने दावा किया कि उन्होंने हूती ठिकानों पर 1,087 ऑपरेशन चलाए। इन कार्रवाइयों में 336 हूती नेता और कर्मी मारे गए, जबकि 112 सैन्य वाहन और उपकरण नष्ट किए गए।
क्षेत्रीय अस्थिरता को देखते हुए सऊदी रक्षा मंत्री ने कनाडा, जर्मनी, स्पेन के रक्षा मंत्रियों और नाटो महासचिव के साथ उच्च स्तरीय चर्चा की है।