सऊदी हवाई अड्डों पर हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला, 3 की मौत के बाद सऊदी सेना ने तबाह किए 82 ठिकाने

यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के नागरिक हवाई अड्डों को निशाना बनाकर भीषण हमले किए हैं। मंगलवार और बुधवार के बीच रियाद और अब्हा के हवाई अड्डों पर हुए इन हमलों में तीन लोगों की जान चली गई और 36 अन्य घायल हो गए। इस हमले के बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने जोरदार जवाबी कार्रवाई करते हुए हूती विद्रोहियों के 82 सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है।
सऊदी जनरल अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन (GACA) के मुताबिक, अब्हा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में एक मिस्र और एक अल्जीरियाई नागरिक की मौत हो गई, जबकि 28 लोग घायल हुए। वहीं, रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक सूडानी नागरिक की जान गई और आठ अन्य घायल हुए, जिनमें सऊदी, मिस्र और पाकिस्तान के नागरिक शामिल हैं। हूती प्रवक्ता याह्या साaree ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि उन्होंने रियाद और अब्हा हवाई अड्डों के साथ-साथ खामिस मुशायत स्थित किंग खालिद एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं।
जवाबी कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव
सऊदी गठबंधन ने तुरंत एक्शन लेते हुए रियाद के उत्तर में एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही रोका और सना के पास एक लॉन्च प्लेटफॉर्म को तबाह कर दिया। इसके बाद एक बड़े काउंटर-ऑफेंसिव ऑपरेशन में सादा, होदेइदा, अल-जौफ और मारिब में स्थित हूती कमांड सेंटर, मिसाइल डिपो और संचार केंद्रों सहित 82 ठिकानों को जमींदोज कर दिया गया।
इस हिंसा का असर केवल जमीन तक सीमित नहीं रहा। यमन के परिवहन मंत्रालय ने बताया कि हूती विद्रोहियों ने अदन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी मिसाइलें दागीं। वहीं, कतर के उत्तरी तट से करीब 94 किलोमीटर दूर एक टैंकर पर भी प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिसमें हताहतों की खबरें हैं। इस तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर बुरा असर पड़ा है; एयर फ्रांस ने 24 अक्टूबर तक और कैथे पैसिफिक ने जनवरी 2027 तक दुबई-रियाद उड़ानों को रद्द या निलंबित कर दिया है।
इस संघर्ष का मानवीय पहलू बेहद चिंताजनक है। IOM के महानिदेशक एमी पोप के अनुसार, हालिया लड़ाई के कारण 2 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं और यमन के कई हिस्सों में तीन में से चार परिवार खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। आर्थिक मोर्चे पर, ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर 102.84 डॉलर तक पहुंच गईं और यूएई में ईंधन की कीमतों में 11 से 16 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस विवाद को लेकर ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।