सऊदी एयरपोर्ट पर हूती हमले से हड़कंप, ट्रंप ने की निंदा, मृतक बढ़े

रियाद: सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हूती हमलों ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। 10 से 13 अक्टूबर 2026 के बीच यमन स्थित ईरान समर्थित इस उग्रवादी संगठन ने राजधानी रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और दम्माम के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाया। इन हमलों में कई लोगों की जान चली गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर सख्त प्रतिक्रिया दी है।
सबसे भयावह हमला रियाद के किंग खालिद एयरपोर्ट पर हुआ, जहां कम से कम 12 लोगों की मौत हुई। मरने वालों में एक अमेरिकी नागरिक भी शामिल है। 300 से ज्यादा लोग घायल बताए गए हैं। 11 अक्टूबर को उसी एयरपोर्ट पर दोबारा हमला हुआ, जिसमें एक और व्यक्ति की मौत हो गई और 11 लोग घायल हुए। इसके बाद रियाद एयरपोर्ट का संचालन रोक दिया गया है, और यह बंदी कम से कम 17 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।
दम्माम में भी दहशत, विमानों के पास आग
दम्माम के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी हालात बिगड़े। एक प्रोजेक्टाइल रनवे पर खड़े विमानों के पास जा गिरा, जिससे आग भड़क उठी और एयरपोर्ट के ढांचे को नुकसान पहुंचा। हूती सैन्य प्रवक्ता याहिया सरी ने इन हमलों के साथ सऊदी अरामको की दो सुविधाओं पर हमले की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने एयरलाइनों को सीधी चेतावनी भी दी है कि वे सऊदी अरब में अपना काम बंद करें, नहीं तो और गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इन कार्रवाइयों को निर्दोष नागरिकों की जिंदगी की "खुली अवहेलना" बताया। वहीं सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इन घटनाओं को युद्ध अपराध करार दिया है। गठबंधन का कहना है कि उसने रियाद और खमीस मुशैत की ओर दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया।
ट्रंप ने बताया कि उनकी सऊदी crown prince मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत हुई है। उन्होंने हूतियों के बारे में कहा कि वे "बहुत बुरा बर्ताव" कर रहे हैं। यह भी संकेत दिया कि अमेरिका यमन में सऊदी सैन्य अभियान में संभावित भूमिका पर विचार कर रहा है। उनके शब्द थे, "हम देखेंगे, हम इस पर विचार करने वाले हैं।"
इस बीच सऊदी अधिकारियों ने हालात को देखते हुए स्कूलों को ऑनलाइन पढ़ाई पर शिफ्ट कर दिया है। एयरपोर्ट बंद होने और हमलों के डर से हजारों यात्री और प्रवासी कामगार सीधे प्रभावित हुए हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं और अमेरिका की भूमिका किस दिशा में जाती है।