सऊदी अरब में हूती हमले तेज़, रियाद एयरपोर्ट बंद और बड़ी बिल्डिंग अब निशाने पर, कहीं भी हो सकता हैं हवाई हमला.

Nura Basta13 October 20262 min read0 viewsSaudi
सऊदी अरब में हूती हमले तेज़, रियाद एयरपोर्ट बंद और बड़ी बिल्डिंग अब निशाने पर, कहीं भी हो सकता हैं हवाई हमला.

रियाद: सऊदी अरब पर यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों के मिसाइल और ड्रोन हमले लगातार तेज़ होते जा रहे हैं। शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को राजधानी रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (KKIA) पर हुए हमले में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज़्यादा लोग घायल हुए। यह एक हफ्ते में इसी एयरपोर्ट पर हुआ तीसरा हमला था।

अगले ही दिन, रविवार 11 अक्टूबर को एयरपोर्ट पर फिर हमला हुआ, जिसमें एक पाकिस्तानी नागरिक की जान गई और 11 लोग घायल हुए। सोमवार 12 अक्टूबर को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि रियाद की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को रोक लिया गया, जबकि खमीस मुशैत एयर बेस की तरफ दो और बैलिस्टिक मिसाइलें छोड़ी गई थीं।

एयरपोर्ट बंद, विदेशी एयरलाइंस ने उड़ानें रोकीं

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हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरिया ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी ली है। उनका दावा है कि समूह ने बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज़ मिसाइल और ड्रोन के मेल से KKIA और खमीस मुशैत एयर बेस को सटीक निशाना बनाया। सरिया ने अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों को चेतावनी भी दी है कि मक्का और मदीना के हवाई अड्डों को छोड़कर बाकी सऊदी एयरपोर्ट अब उनके निशाने पर हैं।

इस चेतावनी का असर साफ दिख रहा है। सऊदी जनरल अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन (GACA) ने किंग खालिद एयरपोर्ट पर अस्थायी रोक को 17 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दिया है, ताकि नुकसान का आकलन और सुरक्षा जांच पूरी हो सके। कुवैत एयरवेज़, लुफ्थांसा ग्रुप, डेल्टा एयर लाइंस, एतिहाद एयरवेज़, फ्लाईदुबई और एमिरेट्स ने रियाद की उड़ानें या तो रद्द कर दी हैं या स्थगित कर दी हैं। डेल्टा ने अमेरिका से रियाद की सीधी सेवा शुरू करने की योजना भी मार्च 2027 तक टाल दी है। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने अपने नागरिकों से रियाद की यात्रा से बचने को कहा है।

ऊर्जा सेक्टर को लेकर भी चिंता बढ़ी है। सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान ने सोमवार को कहा कि देश का ऊर्जा ढांचा दबाव में है और अब सुरक्षा को हल्के में नहीं लिया जा सकता। हूती समूह ने सरकारी तेल कंपनी अरामको की सुविधाओं पर हमले का दावा भी किया है। प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक, मिसाइलों की बौछार से पहले हूती लड़ाकों ने ड्रोन से हवाई सुरक्षा के रडार को नाकाम करने की कोशिश की।

सबसे बड़ा सवाल चेतावनी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। सरकार ने जांच शुरू की है कि 10 अक्टूबर के पहले और सबसे घातक हमले के समय नागरिकों को अलर्ट क्यों नहीं मिल सका। संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुतेरेश ने नागरिक ढांचे पर हुए इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। एयरपोर्ट हमलों में मरने वालों की संख्या अब कम से कम 20 तक पहुंच गई है। इसी बीच कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सऊदी नेतृत्व वाले अभियान में अमेरिका की संभावित भागीदारी पर विचार कर रहे हैं।

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