सऊदी अरब पर हूती ड्रोन हमला, अमेरिका ने दी 24 अरब डॉलर के F-35 फाइटर जेट डील को मंजूरी

सऊदी अरब की राजधानी रियाद और अल-खार्ज शहर में हाल ही में हुए धमाकों के बाद सऊदी सिविल डिफेंस ने आपातकालीन आश्रय प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिया। वर्तमान हूती सैन्य अभियान के दौरान यह पहला मौका है जब देश की राजधानी को इस तरह के अलर्ट मोड पर आना पड़ा है। सायरन बजने से कुछ ही समय पहले, ताइफ शहर में एक इंटरसेप्ट किए गए हूती ड्रोन का मलबा गिरने से एक यमनी नागरिक की मौत हो गई, जबकि एक सऊदी महिला और एक पाकिस्तानी नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए। पाकिस्तानी नागरिक की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है और उसे अस्पताल में गहन चिकित्सा में रखा गया है। इस महीने सऊदी अधिकारियों ने देश भर में ऐसे हमलों में 80 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना दी है।
खाड़ी देशों की कड़ी निंदा और क्षेत्रीय तनाव
इस हमले के बाद खाड़ी देशों में हड़कंप मच गया है और कड़े शब्दों में इसकी निंदा की गई है। जीसीसी के महासचिव जस्सीम अलबुदैवी ने इस हमले की कड़ी आलोचना की है। उनके अलावा बहरीन, कतर, कुवैत, जॉर्डन, अरब लीग, मुस्लिम वर्ल्ड लीग और अरब आंतरिक मंत्री परिषद ने भी इन हमलों को लेकर अपनी गहरी नाराजगी जताई है। दूसरी ओर, हूती नेता अब्देल-मलिक अल-हूती ने मक्का को निशाना बनाने के सभी आरोपों से साफ इंकार किया है। उन्होंने उन दावों को खारिज किया जिसमें कहा गया था कि पवित्र शहर के पास गिराया गया ड्रोन मक्का की तरफ दागा गया था। हालांकि, हूती सैन्य प्रवक्ता यहया सारी ने खमीस मुशायट में हैंगर, रडार और गोला-बारूद पर सफल हमलों का दावा किया है, साथ ही यानबू और दक्षिणी एयरबेस पर भी ऑपरेशन चलाने की बात कही है। जवाब में, सऊदी अरब के F-15 लड़ाकू विमानों ने ताइज़, मारिब, हज्जा और होदेइदाह इलाकों में ताबड़तोड़ उड़ानें भरी हैं। दोनों पक्षों की तरफ से सामने आए हताहतों के आंकड़ों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
होरमुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में बढ़ता संकट
खाड़ी क्षेत्र में तनाव का असर अब रणनीतिक जलमार्गों पर भी साफ दिखने लगा है। होरमुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में लगातार संघर्ष जारी है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने ओमान के खासब के पास अवैध आवाजाही के आरोप में टोगो के झंडे वाले टैंकर 'ट्रेंड' को अपने कब्जे में ले लिया है, जिसकी जानकारी UKMTO ने दर्ज की है। इस बीच, इटली ने इस जलडमरूमध्य में अपने युद्धपोत तैनात करने का फैसला किया है और यूरोपीय संघ के 'ऑपरेशन एस्पिडेस' ने भी अपने अलर्ट स्तर को काफी बढ़ा दिया है। ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए पिछले हमले के बाद अब सऊदी अरब के तेल का परिवहन पूरी तरह से लाल सागर की तरफ मोड़ दिया गया है। इसके अलावा, सोहार के पास समुद्र में जहाज से जहाज पर कच्चे तेल का ट्रांसफर किया जा रहा है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें प्रभावित हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
अमेरिका और सऊदी अरब के बीच बड़ी रक्षा डील
क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कांग्रेस को संभावित 24.3 अरब डॉलर की विदेशी सैन्य बिक्री की सूचना दी है। इस रक्षा सौदे में 48 F-35A लाइटनिंग II इंजन और 49 प्रैट एंड व्हिटनी F135 इंजन शामिल हैं। यदि 30 दिन की समीक्षा प्रक्रिया के बाद इस डील को मंजूरी मिल जाती है, तो सऊदी अरब इस उन्नत तकनीक को हासिल करने वाला पहला अरब देश बन जाएगा। वाशिंगटन स्थित सऊदी दूतावास ने इस समझौते को दोनों देशों के बीच एक मजबूत और स्थायी साझेदारी करार दिया है। हालांकि, इस सौदे को लेकर अमेरिका के कुछ सांसदों और इजरायली हलकों में चिंता भी जताई जा रही है। उनका मानना है कि इससे इजरायल की सैन्य बढ़त प्रभावित हो सकती है और संवेदनशील स्टील्थ तकनीक साझा करने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कूटनीतिक मोर्चे पर भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। होरमुज शिपिंग को लेकर ओमान में होने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक को सऊदी अरब और ईरान के बीच गतिरोध तथा बहरीन के शामिल न होने के कारण फिलहाल टालना पड़ा है। इसके बावजूद, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर संयुक्त अरब अमीरात के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से मुलाकात की है और आगामी संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में अमेरिका-जीसीसी के बीच अहम चर्चा होने की उम्मीद जताई जा रही है।