सऊदी पर बड़ा हमला, बाब अल-मंबंध जलडममध्य पर हूती बलों का कब्जा, कई देशों से मांगी मदद.

मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और इस बीच विश्लेषक Mahmoud Shahrani ने बड़ी जानकारी दी है कि ईरान रणनीतिक रूप से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष अब और ज्यादा गंभीर रूप ले चुका है, जिससे पूरे इलाके में खलबली मची हुई है। आम जनता और वहां काम करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक बनती जा रही है क्योंकि इसका असर सीधे तौर पर सुरक्षा और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।
हूती बलों का लाल सागर तट पर पूरा कब्जा
तारीख 15 सितंबर 2026 के आसपास की स्थिति को देखें तो हूती बलों ने यमन के पूरे लाल सागर तट पर अपना नियंत्रण पूरी तरह से स्थापित कर लिया है। इसमें Perim Island, Mayyun Island, Hanish Islands और मोखा का बंदरगाह शहर भी शामिल है। हूती सैन्य प्रवक्ता Yahya Saree ने अदन की खाड़ी और बाब अल-मंबंध जलडममध्य में अमेरिकी युद्धपोतों पर सफल अभियानों का दावा किया और एक अमेरिकी जहाज पर सीधे हमले की बात कही। दूसरी तरफ, एक खाड़ी राजनयिक सूत्र ने 19 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी कि ईरान हूती विद्रोहियों पर दबाव बना रहा है कि वे सऊदी अरब के साथ किसी भी समझौते या युद्धविराम को स्वीकार न करें। ऐसा तेल की कीमतों को प्रभावित करने और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों पर असर डालने के लिए किया जा रहा है।
सऊदी अरब की बुनियादी सुविधाओं पर ड्रोन और मिसाइल हमले
यह पूरा सैन्य अभियान ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्स के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है जिसके तहत सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। तारीख 19 और 20 सितंबर 2026 को सऊदी अरब ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की कि रियाद और यानबु में अरामको की सुविधाओं पर हूती मिसाइल और ड्रोन से हमले किए गए। सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने राजधानी की तरफ आ रही एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही रोक दिया और नष्ट कर दिया। इसके बाद सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग ने देश के बड़े शहरी केंद्रों में आपातकालीन अलर्ट जारी कर दिए।
सऊदी अरब ने मांगी अन्य देशों से रक्षा सहायता
मिसाइल इंटरसेप्टर यानी रोकने वाले हथियारों की कमी का सामना कर रहे सऊदी अरब ने फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से वायु रक्षा सहायता की औपचारिक मांग की है। इसी बीच तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने 19 सितंबर 2026 को यह बयान दिया कि तुर्की पाकिस्तान के साथ हुए रक्षा समझौते के तहत सैन्य सहायता प्रदान कर सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump भी इस तेजी से बढ़ते तनाव और स्टेट डिपार्टमेंट की चेतावनी के बाद 20 सितंबर 2026 को सुबह-सुबह व्हाइट हाउस लौट आए। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 19 सितंबर को इन हमलों की कड़ी निंदा की और बताया कि इसमें नागरिकों के हताहत होने के साथ-साथ ऊर्जा ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद ने भी यह पुष्टि की है कि भारी लड़ाई के बीच उनके सैनिक धूबाब जिले की तरफ पीछे हट गए हैं। इस पूरे संघर्ष और तनाव की वजह से मानवीय संकट भी गहराता जा रहा है, जहाँ 112,000 से अधिक लोग अपने घरों को छोड़कर भागने पर मजबूर हो गए हैं और करीब 3,000 लोगों ने पड़ोसी देश जिबूती में शरण ली है।