यमन के लाल सागर तट पर हूती विद्रोहियों का कब्जा, बाब अल-मंताब जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव.

लाल सागर के पास क्षेत्रीय समुद्री तनाव तब बहुत ज्यादा बढ़ गया जब ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने एक तेज सैन्य अभियान के तहत यमन के पूरे लाल सागर तट पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। यह पूरी घटना 11 सितंबर से 13 सितंबर 2026 के बीच की है, जिससे वैश्विक व्यापार मार्गों पर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस रणनीतिक और बड़े कब्जे में मोचा नाम का बंदरगाह शहर और मय्यून यानी पेरिम्, ग्रेटर हनीश तथा लेसर हनीश जैसे महत्वपूर्ण द्वीप शामिल हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद बाब अल-मंताब जलडमरूमध्य पर हूती बलों का सीधा नियंत्रण हो गया है, जो एशिया और यूरोप के बीच होने वाले वैश्विक व्यापार का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। अल जज़ीरा की पत्रकार दलिया अल मास्री ने इस रास्ते पर इस समूह की नई ताकत के बारे में बताया, जबकि समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ एलेक्जेंडु क्रिस्टियन हुडिस्टियानु ने कहा कि यह रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य की तुलना में काफी संकरा है और इसकी निगरानी करना आसान है।
हिंसा में 500 से ज्यादा लोगों की मौत और हजारों हुए बेघर
इस अचानक हुए सैन्य हमले के कारण अब तक कम से कम 500 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 46,000 लोग अपने घरों को छोड़कर भागने पर मजबूर हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन के अनुसार, 13 सितंबर 2026 को समाप्त हुए 24 घंटों के भीतर ही लगभग 1,400 यमनी नागरिक भागकर जिबूती पहुंच गए। सऊदी अरब समर्थित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार ने इस क्षेत्र के नुकसान को एक बेहद दर्दनाक विकास बताया है। यह पूरा सैन्य तनाव 10 सितंबर को हुई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के ठीक बाद सामने आया है, जिसमें यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने चेतावनी दी थी कि यह शत्रुतापूर्ण माहौल शांति की एक छोटी अवधि के अंत का संकेत देता है।
इसके ठीक बाद 12 सितंबर 2026 को सऊदी अरब के जाजान इलाके में हूती बलों के एक प्रोजेक्टाइल हमले में दो लोग घायल हो गए और एक मस्जिद तथा आसपास की कई इमारतें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके बाद 13 सितंबर तक इस विद्रोही समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन से किए गए अन्य हमलों की जिम्मेदारी भी ले ली। हालांकि हूती सेना के प्रवक्ता याहया सारे ने बयान दिया कि सऊदी अरब जाने वाले जहाजों को छोड़कर यह जलडमरूमध्य सभी जहाजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है और पोलित ब्यूरो के सदस्य हजेम अल-असद ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता की कोई बात नहीं है, लेकिन उनके इन आश्वासनों का अप्रैल 2026 में दी गई उन धमकियों से पूरी तरह विरोधाभास है जिसमें उन्होंने इस रास्ते को पूरी तरह से बंद करने की बात कही थी। ईरान ने इस पूरी घटना पर सार्वजनिक रूप से हूती विद्रोहियों को बधाई दी और इसे एक बड़ी जीत बताया है।
शिपिंग कंपनियों और वैश्विक बाजार पर संकट
इस तनाव के बाद पूरी शिपिंग इंडस्ट्री में भारी उथल-पुथल मच गई है और कंपनियां स्वेज नहर से बचने के लिए अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते अपने जहाजों को घुमाने पर विचार कर रही हैं। साल 2023 के अंत से ही इस जलडमरूमध्य से होने वाला शिपिंग ट्रैफिक लगभग 60 प्रतिशत तक कम हो चुका था। सोमालिया के व्यापारी भी अब वैकल्पिक व्यापार मार्गों की तलाश कर रहे हैं क्योंकि इस क्षेत्रीय अस्थिरता से दुनिया भर के ऊर्जा बाजार और सप्लाई चेन पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। इस पूरी स्थिति पर Al Jazeera की रिपोर्ट्स में विस्तार से जानकारी दी गई है कि कैसे यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए एक अहम कड़ी है। खाड़ी देशों में रहने वाले और भारत के बीच आने-जाने वाले लोगों के लिए भी इस तनाव के कारण सुरक्षा और यात्रा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं क्योंकि मध्य पूर्व में लगातार बिगड़ते हालात आम जनजीवन को प्रभावित कर रहे हैं।