Yemen Crisis: हूती लड़ाकों ने लाल सागर के पास मयून द्वीप पर किया कब्जा, यमनी सरकार पीछे हटी.

लाल सागर के पास जारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ यमनी सरकार के सूत्रों ने शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को यह कंफर्म किया कि हूती लड़ाकों ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम पेरिम द्वीप (जिसे मयून द्वीप भी कहा जाता है) पर अपना कब्जा जमा लिया है। यह द्वीप बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के पास स्थित है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बहुत संवेदनशील माना जाता है। यमनी सरकारी बलों ने गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को ही इस द्वीप से अपने कदम पीछे खींच लिए थे जिसके बाद हूती बलों ने यहाँ आसानी से नियंत्रण हासिल कर लिया।
लाल सागर के तटीय इलाकों में हूती बलों का बड़ा विस्तार
पेरिम द्वीप पर कब्जा करने के साथ-साथ हूती बलों ने लाल सागर के तटीय शहर धुबाब में भी आगे बढ़कर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। इसके अलावा, हूती लड़ाके हानिश द्वीप समूह तक भी पहुँच चुके हैं जो इस समुद्री रास्ते पर उनकी पकड़ को और ज्यादा मजबूत करता है। पिछले हफ्ते शुरू हुए एक बड़े पैमाने के आक्रामक अभियान के बाद हूती सेना ने गुरुवार, 10 सितंबर को रणनीतिक बंदरगाह शहर मोचा पर भी कब्जा कर लिया था। मोचा शहर के हाथ से निकलने के बाद सऊदी अरब की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली और सऊदी वायु सेना ने शुक्रवार को मोचा एयरपोर्ट पर दो एयरस्ट्राइक की। इस समय यह एयरपोर्ट और पूरा शहर हूती बलों के नियंत्रण में है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी प्रतिक्रिया और ईरान का नाम
यमन की इस बिगड़ती स्थिति पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र यानी UN के यमन मामलों के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने गुरुवार को चेतावनी दी कि यह संघर्ष के एक नए और ज्यादा खतरनाक चरण की शुरुआत है। उन्होंने साफ कहा कि मोचा पर हूती नियंत्रण होने से दुनिया के महत्वपूर्ण शिपिंग रूट्स के पास सीधा खतरा पैदा हो गया है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की प्रतिनिधि जेनिफर नीडहार्ट डी ऑर्टिज ने इस बढ़त को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया और कहा कि जो लोग इस हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं, उन्हें इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि हूती संगठन ईरान के एजेंट के रूप में काम कर रहा है। क्षेत्रीय और ईरानी सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि यह पूरा सैन्य अभियान ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के सीधे मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है।
सऊदी अरब और अमेरिका के बीच कूटनीतिक बातचीत
हालाँकि कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज है। रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से यह अनुरोध किया था कि वे हूतियों के खिलाफ हमलों के लिए अमेरिकी सेना को अधिकृत करें, लेकिन अमेरिका ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और कार्रवाई से इनकार कर दिया। इन सबके बीच हूती प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुलसलाम ने गुरुवार को एक बयान में दावा किया कि लाल सागर में नेविगेशन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने अपने संगठन के अभियानों को रक्षात्मक बताते हुए कहा कि अगर यमन पर लगी नाकाबंदी को हटा लिया जाए और बाहरी हमले बंद हो जाएं तो वे अपनी कार्रवाई रोक देंगे। वहीं दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर बातचीत का रास्ता अपनाने की बात कही है और इस बात पर जोर दिया है कि इस विवाद का हल किसी भी सैन्य कार्रवाई या नाकाबंदी से नहीं निकल सकता है।