मक्का और मदीना की ओर हूती बलों ने दागी मिसाइलें, शेख अल-सुदैस ने इस हमले की कड़ी निंदा की
शेख अल-सुदैस और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने मक्का और मदीना की ओर दागे गए हूती मिसाइलों की कड़ी निंदा की है।

रियाद: मस्जिद अल-हरम के ग्रैंड इमाम और दो पवित्र मस्जिदों के मामलों के अध्यक्ष शेख अल-सुदैस ने मक्का और मदीना को निशाना बनाने वाले हूती बलों के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि पवित्र शहरों पर बार-बार किए जा रहे ये हमले हूती मिलिशिया की आपराधिक मंशा को साफ तौर पर उजागर करते हैं।
यह बयान 24 अक्टूबर 2026 को हुई सैन्य कार्रवाई के बाद आया है। सऊदी सिविल डिफेंस के मुताबिक, हूती मिलिशिया ने मक्का और मदीना के इलाकों की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, जिन्हें बीच में ही रोक लिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि मिसाइलों के मलबे मक्का के पास वादी अल-मगमास समेत जेद्दा, तायफ और रबीघ के अलग-अलग हिस्सों में गिरे। सऊदी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस दौरान सभी मानक आपातकालीन प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने सऊदी रिपोर्ट को एक बड़ा झूठ बताते हुए दावा किया कि उनके सैन्य अभियान केवल तेल प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों पर केंद्रित होते हैं।
इस घटना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी निंदा हुई है। 24 अक्टूबर 2026 को ओआईसी के महासचिव इस्माइल ओल्ड शेख अहमद ने अराफात के पास हुए मिसाइल हमले को पवित्र स्थलों की मर्यादा का उल्लंघन बताया।
25 अक्टूबर 2026 को जीसीसी महासचिव जासेम मोहम्मद अलबुदईवी ने भी इस हमले की निंदा की। उन्होंने इन हमलों को दुनिया भर के मुसलमानों के लिए एक गंभीर उकसावा करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सख्त प्रतिक्रिया की मांग की।
इन घटनाओं से ठीक पहले 23 अक्टूबर 2026 को सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास ने एक यात्रा परामर्श जारी किया था। इसमें मिसाइलों और ड्रोन के संभावित हमलों के कारण क्षेत्रीय आक्रामकता के बढ़ते जोखिम की चेतावनी दी गई थी।