सऊदी अरब पर बड़ा हमला, रियाद और खामिस मुशायित की तरफ दागे गए ड्रोन और मिसाइल.

सऊदी अरब की राजधानी रियाद और दक्षिण शहर खामिस मुशायित पर शनिवार को यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला कर दिया। इस खतरनाक हमले के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है। सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उनकी एयर डिफेंस प्रणाली ने खामिस मुशायित को निशाना बनाने वाली दो बैलिस्टिक मिसाइलों और रियाद की तरफ आ रहे दो ड्रोन्स को हवा में ही सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। गनीमत यह रही कि इस बड़े हमले में किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है, लेकिन इस घटना से क्षेत्र में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है।
खाड़ी देशों ने की कड़ी निंदा और जताया विरोध
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के महासचिव जसिम मोहम्मद अल-बुदैवी ने रियाद से एक कड़ा बयान जारी करते हुए इन हमलों को आतंकवादी हूती हमला करार दिया है। उन्होंने इस घटना को गंभीर तनाव, देश की संप्रभुता का खुला उल्लंघन और आम नागरिकों की सुरक्षा तथा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सीधा खतरा बताया है। अल-बुदैवी ने स्पष्ट किया कि सभी छह जीसीसी सदस्य देश यानी सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान सऊदी अरब की क्षेत्रीय अखंडता और उसकी रक्षा के लिए उठाए जाने वाले हर कदम के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं।
युद्धविराम टूटने के बाद बढ़ी लगातार मुश्किलें
बीते जुलाई महीने से ही हूती विद्रोहियों ने चार साल से चले आ रहे अनौपचारिक समझौते को तोड़ दिया है। उन्होंने लाल सागर के तटीय इलाकों पर कब्जा करना शुरू कर दिया है और बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के पास रणनीतिक द्वीपों को अपने नियंत्रण में ले लिया है। इसके साथ ही वे सऊदी ऊर्जा टैंकरों को लगातार निशाना बना रहे हैं। इस महीने की शुरुआत में भी इसी मिलिशिया ने रियाद में किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास अरामको के ईंधन टैंक पर हमला करने का दावा किया था, जिसके बाद वहां से धुआं उठने और आग लगने की घटना सामने आई थी।
सुरक्षा को लेकर कड़े कदम और अंतरराष्ट्रीय अपील
इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए सऊदी अरब सरकार तुर्की और पाकिस्तान के साथ मिलकर रक्षा मामलों पर जरूरी बातचीत कर रही है, ताकि एक बड़ा सैन्य रक्षा घेरा तैयार किया जा सके। दूसरी तरफ, ईरान अपनी तरफ से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए सात दिन की योजना पेश कर रहा है। इन तमाम सैन्य गतिविधियों और हमलों की वजह से उड़ानों के संचालन पर असर पड़ा है, बीमा की लागत बढ़ गई है, ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और रियाद में कुछ स्कूलों की कक्षाओं को सुरक्षा कारणों से ऑनलाइन मोड में शिफ्ट कर दिया गया है। जीसीसी के अधिकारियों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की है कि वे हूती विद्रोहियों और उनके हथियारों के सप्लायरों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करें ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।