रियाद एयरपोर्ट पर हूती मिसाइल हमला: मची अफरा-तफरी, कई मौतें और उड़ानें रद्द

सऊदी अरब की राजधानी रियाद में तनाव चरम पर है। किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हूती मिसाइल हमलों ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी है। इस हमले में अब तक तीन नागरिकों की जान जा चुकी है, जिनमें मिस्र, अल्जीरिया और सूडान के नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा, एक पाकिस्तानी नागरिक सहित कुल 36 लोग घायल हुए हैं। हूती विद्रोहियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उनके निशाने बिल्कुल सटीक थे, जिससे हवाई अड्डे के कामकाज में भारी बाधा आई है।
सऊदी गठबंधन ने बताया कि उन्होंने राजधानी के ऊपर दो बैलिस्टिक मिसाइलों को नाकाम किया, लेकिन उनके मलबे से एक किंडरगार्टन और एक मेडिकल क्लिनिक कॉम्प्लेक्स को काफी नुकसान पहुँचा है। फ्लाइटराडार24 ने भी एयरपोर्ट पर गतिविधियों के रुकने की पुष्टि की है। इस हमले के जवाब में सऊदी अरब ने कड़ा रुख अपनाया है। मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने घोषणा की है कि गठबंधन ने सादा, होदेइदा, अल-जौफ और मारिब में 82 हूती सैन्य ठिकानों, कमांड सेंटरों और मिसाइल स्टोरेज सुविधाओं को निशाना बनाते हुए एक बड़ा ऑपरेशन चलाया है।
समुद्री हमलों और आर्थिक संकट का साया
तनाव केवल जमीन तक सीमित नहीं है। कतर के मदीनत अल शमाल के पास एक टैंकर पर भी कई प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया, जिससे वहां जान-माल का नुकसान हुआ है। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने पुष्टि की है कि यह घटना कतर के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन में हुई। वहीं, ईरान और ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित समुद्री रास्तों के लिए भौगोलिक समन्वय पर सहमति जताई है, हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जलडमरूमध्य को बंद करने के ईरानी दावों को खारिज कर दिया है।
इस युद्ध जैसे हालात का सीधा असर अर्थव्यवस्था और आम जनता पर पड़ा है। शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी गई है, जहाँ सऊदी इंडेक्स 1.6%, दुबई 1.7% और कतर का बाजार 2.2% तक गिर गया। कच्चे तेल की कीमतें 100 से 103 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं।
हवाई यात्रा करने वालों के लिए भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। एमिरेट्स, एतिहाद, फ्लाईदुबई, एयर अरेबिया, एयर फ्रांस और कैथे पैसिफिक जैसी बड़ी एयरलाइनों ने रियाद और दुबई सहित अन्य क्षेत्रीय केंद्रों के लिए अपनी सेवाओं में बदलाव किया है या उन्हें रद्द कर दिया है। इसके साथ ही, यूएई में अक्टूबर के ईंधन की कीमतों में 11.6 से 16.6 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है, जिससे आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ा है।