Saudi Arabia पर मिसाइल हमला, किंग खालिद एयरपोर्ट के पास डिपो में लगी आग.

Praggya Singh sabal22 September 20263 min read0 viewsSaudi
Saudi Arabia पर मिसाइल हमला, किंग खालिद एयरपोर्ट के पास डिपो में लगी आग.

सऊदी अरब की राजधानी रियाद में शनिवार, 19 September 2026 को उस समय हड़कंप मच गया जब शहर में अचानक तेज धमाकों की आवाजें गूंज उठीं। इस हमले के बाद किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास स्थित अरामको के एक फ्यूल डिपो से काले धुएं का गुबार आसमान में उठता हुआ साफ दिखाई दिया। सऊदी एयर डिफेंस ने इस हमले को लेकर जानकारी दी कि उन्होंने एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही रोकने का प्रयास किया था, लेकिन इसके बावजूद धमाके और मलबे की वजह से राजधानी के एयरपोर्ट पर उड़ानों में देरी हुई और कई उड़ानों को रद्द करना पड़ा। मौजूदा तनाव के बीच रियाद पर हुआ यह पहला ऐसा हमला है जिसकी पुष्टि आधिकारिक तौर पर की गई है। इस घटना के बाद से आम लोगों और वहां रहने वाले प्रवासियों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं, खासकर उन भारतीयों के लिए जो इन इलाकों में काम करते हैं या अक्सर यात्रा करते हैं।

तनाव और क्षेत्रीय गतिविधियां

पिछले दो हफ्तों से ईरान समर्थित हौथी लड़ाकों ने अपनी गतिविधियों को काफी तेज कर दिया है और उन्होंने बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य के पास मोखा बंदरगाह और मय्यून द्वीप पर कब्जा कर लिया है। इसके बाद मंगलवार, 22 September को हौथी संचालित सबा समाचार एजेंसी ने दावा किया कि मोखा में सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा किए गए हवाई हमलों में छह नागरिकों की मौत हो गई है, जिनमें दो बच्चे और एक महिला शामिल हैं, जबकि आठ लोग घायल हुए हैं। हालांकि, रियाद की तरफ से इन हताहतों के आंकड़ों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेने के लिए दुनिया भर के बड़े नेता न्यूयॉर्क में इकट्ठा हो रहे हैं, जिससे कूटनीतिक हलचल बहुत तेज हो गई है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात के बाद हौथी ठिकानों पर तय किए गए हमलों को रद्द कर दिया था। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची इस समय न्यूयॉर्क में मौजूद हैं और तेहरान ने साफ चेतावनी दी है कि अमेरिका की तरफ से होने वाले किसी भी हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा और वाशिंगटन के सहयोगी देशों के साथ-साथ अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है। विश्लेषकों ने एएफपी के हवाले से यह भी बताया है कि मोखा के पास कब्जा किए गए इलाकों में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के अधिकारियों को देखा गया है।

समुद्री जहाजों पर बढ़ता खतरा

समुद्री व्यापार और शिपिंग पर भी इस संघर्ष का बहुत बुरा असर पड़ रहा है। सोमवार को जब एक पनामा के झंडे वाला टैंकर हॉर्मूज जलडमरूमध्य में प्रवेश कर रहा था, तब उस पर किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला कर दिया गया, जिससे दो लोग घायल हो गए। हौथी ताकतें लगातार अपने पैर पसार रही हैं और वे हॉर्मूज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य दोनों के लिए बड़ा खतरा बन चुकी हैं। इस अंतरराष्ट्रीय संकट से निपटने के लिए ब्रिटेन ने सऊदी के विमानों को सीमित समर्थन देने की बात कही है, जबकि फ्रांस ने ऊर्जा संयंत्रों की सुरक्षा में मदद करने की पेशकश की है। इसके अलावा जी-7 देशों के विदेश मंत्रियों ने हौथी हमलों को तुरंत रोकने और ईरान से अपने हथियारों की सप्लाई बंद करने की अपील की है। ओमान की मेजबानी में ईरान और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बीच कूटनीतिक बातचीत के प्रयास भी क्षेत्रीय दूरियों के कारण फिलहाल ठप पड़े हुए हैं। बहरीन ने तेहरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत से साफ मना कर दिया है, यूएई ने ईरान के साथ अपने व्यापार को कम कर दिया है, और केवल ओमान तथा कतर ही ऐसे देश हैं जो लगातार बातचीत का सिलसिला जारी रखे हुए हैं। इस कठिन सुरक्षा माहौल की वजह से तेल ले जाने वाले मुख्य रास्ते पूरी तरह से खतरे में आ गए हैं और पूरा क्षेत्र एक गंभीर अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।

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