Yemen Crisis: हुती नौसैनिक नावों ने अल-हुदैदाह बंदरगाह की तरफ पीछे हटने का किया फैसला, यमनी सेना से हुई झड़प.

9 सितंबर 2026 को यमन के बंदरगाह शहर अल-हुदैदाह में हालात काफी तनावपूर्ण हो गए, जब हुती समुद्री यूनिट्स ने यमनी सरकार की सेना के साथ सीधी नौसैनिक झड़प के बाद रणनीतिक बंदरगाह की तरफ पीछे हटने का फैसला किया। यह घटनाक्रम पिछले कुछ दिनों से चल रही भारी समुद्री अशांति के बाद सामने आया है, जिसमें 5 सितंबर को एक बड़ी झड़प भी शामिल थी। उस दौरान नेशनल रेजिस्टेंस की नौसैनिक ताकतों ने हुती की विस्फोटक से भरी दो नावों को अल-हुदैदाह के दक्षिण में स्थित अल-खोखा के तट पर पहुंचने से पहले ही रोक लिया और नष्ट कर दिया। इस पूरे इलाके में सुरक्षा हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं और आम लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
क्षेत्र में अमेरिकी एयर कैंपेन और हवाई हमले तेज
क्षेत्रीय स्थिति में लगातार आ रहे उतार-चढ़ाव के बीच 9 सितंबर 2026 को अमेरिका ने अपने हवाई अभियानों को और ज्यादा तेज कर दिया। अमेरिकी सेना ने हुती नियंत्रित बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए कुल 13 हमले किए। इन हमलों की चपेट में अल-हुदैदाह और राजधानी सना के बंदरगाह और हवाई अड्डे भी आ गए। ये हमले रस्सा बंदरगाह पर हुए एक बड़े अमेरिकी छापे के ठीक दो दिन बाद किए गए, जिसमें 74 लोगों की मौत हो गई थी और 171 लोग घायल हो गए थे। इसके साथ ही, सऊदी नीत गठबंधन ने भी कामरान द्वीप पर हुती ठिकानों को निशाना बनाकर कई हवाई हमले किए, जिससे पूरे इलाके में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं।
मानवीय समझौते और बंदरगाहों से वापसी
ये सभी सैन्य गतिविधियां एक बेहद नाजुक मानवीय समझौते की पृष्ठभूमि में घटित हो रही हैं। 7 सितंबर 2026 को हुती विद्रोहियों ने आधिकारिक तौर पर अल-हुदैदाह, सालीफ़ और रास ईसा बंदरगाहों से पीछे हटने की घोषणा की। संयुक्त राष्ट्र मिशन के प्रमुख और हुदैदाह समझौते के समर्थन के लिए बने आयोग के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल माइकल लोलेस्गार्ड ने इस बात की पुष्टि की कि इन सभी जगहों की सुरक्षा व्यवस्था को यमन कोस्ट गार्ड को सौंप दिया गया है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस क्षेत्र से भारी सैन्य उपकरणों और हथियारों को पूरी तरह हटाने के लिए अभी बहुत बड़े पैमाने पर काम करने की जरूरत है।
गठबंधन की चेतावनी और आगे का संकट
बंदरगाहों से वापसी के बावजूद यमन में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है, क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के समर्थन वाली यमनी प्रो-गॉर्ममेंट मिलिशिया किसी भी संभावित जमीनी हमले की तैयारी में जुटी हुई है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि देश को 2022 के युद्धविराम के बाद से सबसे बड़े संघर्ष के गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ रहा है, खासकर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास पूर्ण युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं। सऊदी नीत गठबंधन के प्रवक्ता कर्नल तुर्की अल-मल्की ने हुती की लगातार हरकतों का कड़ा जवाब देने की बात कही है। वहीं, सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए और नागरिक तथा आर्थिक स्थलों पर होने वाले हमलों से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।